Friday, August 10, 2018

थप्पड़

वक्त ने
खेंच के थप्पड़ मारा है

कब ?
किसे ?
क्यों ?

पता नहीं ...
पर
आवाज गूंज रही है !

तुम प्रधान हो, कोई तुर्रम नहीं हो
संभल के रहो

कहीं ऐसा न हो
तुम्हारा गाल भी तिलमिला जाए !!

~ उदय