Thursday, July 5, 2012

पाठ ...


तुमको भी मियाँ, झूठ के बहाने नहीं आते 
मरघट मेरा मुकाम है, और तुम शहर में ढूँढते रहे ? 
... 
अगर तुम कह रहे हो तो चलो हम मान लेते हैं 
मगर सच्ची नहीं लगतीं, तेरी बातें हमें यारा ? 
... 
क्या खूब पाठ पढ़ाया है, आज उन्ने हमें 
हमारी वफ़ा का, देकर सिला बेवफाई से !

2 comments:

प्रवीण पाण्डेय said...

मरघट से सब घबराते क्यों..

Unknown said...

keep writing..