Friday, December 24, 2010

चलो बन जाएं आज, हम सब 'सांता क्लाज' !!



चलो बन जाएं आज, हम सब 'सांता क्लाज'
मिलकर बांटे खुशी, सोचें कौन अपना, कौन पराया है !
..........................

तेरी खामोशियों से, कोई शिकायत नहीं है हमको
कम से कम वादा करने, मुकर जाने का डर जो नहीं है !
.............
हर पहर इबादत को, हाथ उठते नहीं हमारे
'खुदा' जानता है, सुबह-शाम के मजदूर हैं हम !
.............
है आलम अमीरी का, फिर भी फटे कपडे
चलो कोई बात नहीं, हम गरीब ही अच्छे हैं !
.............
हर रोज, बदला बदला सा, नजर आता है चेहरा तुम्हारा
चलो आज, खुशनसीबी है, जो मुस्कराहट भी नजर आई !
.............
गरीबी, लूट, मंहगाई, दिन--दिन बढ़ रही है
क्या फर्क, बढ़ने दो, हमें तो सरकार की चिंता है !
.............

17 comments:

Kunwar Kusumesh said...

तेरी खामोशियों से, कोई शिकायत नहीं है हमको
कम से कम वादा करने, मुकर जाने का डर जो नहीं है

बहुत सुन्दर

केवल राम said...

गरीबी, लूट, मंहगाई, दिन-व-दिन बढ़ रही है
क्या फर्क, बढ़ने दो, हमें तो सरकार की चिंता है !
आदरणीय उदय जी
नमस्कार
क्या करार व्यंग्य है....हमें तो सरकार की चिंता है ...इसी सरकार की चिंता ने तो आम गरीबों को गहरी चिंता में... डाल रखा है ..पूरी गजल का एक -एक शेर बहुत अर्थपूर्ण है ...शुक्रिया

मनोज कुमार said...

है आलम अमीरी का, फिर भी फटे कपडे
चलो कोई बात नहीं, हम गरीब ही अच्छे हैं !
सही है।
हैप्पी क्रिसमस!

संगीता स्वरुप ( गीत ) said...

बहुत खूब ..सारे अशआर बढ़िया ...

गौरव शर्मा "भारतीय" said...

तेरी खामोशियों से, कोई शिकायत नहीं है हमको
कम से कम वादा करने, मुकर जाने का डर जो नहीं है !
वाह क्या बात है...

संजय कुमार चौरसिया said...

"मेर्री क्रिसमस" की बहुत बहुत शुभकामनाये

vandan gupta said...

हर पहर इबादत को, हाथ उठते नहीं हमारे
'खुदा' जानता है, सुबह-शाम के मजदूर हैं हम !

सबसे ज्यादा पसन्द आया……………बहुत सुन्दर प्रस्तुति।

Pratik Maheshwari said...

सच वाकई में काफी कड़वा है..
बहुत सुन्दर प्रस्तुति थी.. अच्छा लगा..

आभार

भारतीय नागरिक - Indian Citizen said...

आने वाला नया साल गरीबों के लिये ही कुछ अच्छाई लेकर आये...

Kailash Sharma said...

हर पहर इबादत को, हाथ उठते नहीं हमारे
'खुदा' जानता है, सुबह-शाम के मजदूर हैं हम !

बहुत सुन्दर पंक्तियाँ... सुन्दर प्रस्तुति

संजय भास्‍कर said...

है आलम अमीरी का, फिर भी फटे कपडे
चलो कोई बात नहीं, हम गरीब ही अच्छे हैं !
..............करार व्यंग्य है..

Sushil Bakliwal said...

मेरी क्रिसमस & हेप्पी न्यू ईयर...

प्रवीण पाण्डेय said...

खुशियाँ और प्यार लुटाने के लिये कुछ भी बना दो।

राज भाटिय़ा said...

बहुत सुंदर रचना जी, धन्यवाद

ब्लॉ.ललित शर्मा said...

हैप्पी क्रिसमस मैरी क्रिसमस

महेन्‍द्र वर्मा said...

हर रोज बदला बदला सा, नजर आता है चेहरा तुम्हारा
चलो आज खुशनसीबी है, जो मुस्कराहट भी नजर आई

चेहरे पे मुस्कुराहट आना सचमुच खुशनसीबी है।
बहुत बढ़िया शायरी...शुभकामनाएं।

अनुपमा पाठक said...

बहुत खूब!