Monday, August 16, 2010

शेर : जख्म

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वो आज क्यूं जख्म बन, मेरी आँखों में उतर आये थे
जब आँख से निकले तो, खून के कतरे निकले

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6 comments:

डॉ. महफूज़ अली (Dr. Mahfooz Ali) said...

. बहुत सुंदर शे' र ...........

Unknown said...

बहुत खूब .....

Majaal said...

महाकवि उदय तो आज पूरे फॉर्म में है!

Udan Tashtari said...

शानदार!

पूनम श्रीवास्तव said...

bahut hi khob sher,
uday ji.
poonam

दिगम्बर नासवा said...

ग़ज़ब लिखा है .. कमाल ..