Friday, September 23, 2011

... खूब तमाशे हैं, क्या खूब नज़ारे हैं !

चहूँ ओर लाग-लपेटा है, कहीं छोटा तो कहीं मोटा है
चढ़ते, बढ़ते, हिन्दी है, फिर भी हिन्दी का टोटा है !!
...
प्यार की दास्ताँ गुलाबी पंखुड़ी-सी है
किसी को छूने, देखने, की मनाही है !
...
इतनी बेरुखी का सबब, कुछ तो होगा जरुर
बिना जाने कैसे कह दें, कुसूर हमारा होगा !
...
गर ये दिल होता हमारा, तो टूट गया होता
पता नहीं कब से, कैसे, ये हमारा न रहा !!
...
सदभावना, स्वाभिमान, रथ, जय जयकार है
उफ़ ! क्या खूब तमाशे हैं, क्या खूब नज़ारे हैं !
...
तेरी सोहबत ने हमें क्या से क्या बना दिया है 'उदय'
कल तक थे हम आशिक, आज आशिक ज़माना है !
...
बा-मुलाहिजा होशियार साहब आ रहे हैं
कभी अपनों की, तो कभी अपनी सुना रहे हैं !
...
काश ! ये हुनर हम में भी होता 'उदय'
दिखते किसी के, और होते किसी और के !
...
काश ! जिन्दगी घड़ी-दो-घड़ी को मृगतृष्णा होती
कभी राधा-कृष्ण, तो कभी सीता-राम, हम होते !
...
लो आज उनसे मिलना हमारा नाजायज हो गया
लोग कहते हैं कि हमारी मुहब्बत जायज नहीं है !

1 comment:

प्रवीण पाण्डेय said...

अजब नजारे है यह दुनिया।