Sunday, August 22, 2010

मंदिर-मस्जिद

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ईश्वर को रास आते नहीं, अब मंदिर-मस्जिद
उसे तो बस, तुम्हारे दिलों में अब जगह चाहिये

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9 comments:

ब्लॉ.ललित शर्मा said...

बढिया शेर,उम्दा।

आभार

36solutions said...

काश यह भाव दुनिया समझ पाती.

धन्यवाद भाई.

गब्बर सिंग said...

haa haa haa haa haa haa

Majaal said...

क़र्ज़ की फिकर में इस कदर डूबे 'मजाल',
खुदा घर आए तो उनसे किराया मांग लिया!

सूर्यकान्त गुप्ता said...

ati uttam....badhaai aacharya ji

कडुवासच said...

@ Majaal
... vaah majaal miyaan vaah, kyaa khoob kahee !!!

आपका अख्तर खान अकेला said...

bhut khub jnab thodi si laainon men hindustaan smet daalaa . akhtar khan akela kota rajsthan

DR. ANWER JAMAL said...

Please have a look on
http://vedquran.blogspot.com/2010/08/submission-to-god-for-salvation-anwer.html

राज भाटिय़ा said...

अच्छी प्रस्तुति। आभार