Friday, March 12, 2010

कर्म

मैं
निर्माण करूंगा
भाग्य का

मेरे विचार
कर्म का रूप लेंगे
कर्म का प्रत्येक अंश
मेरे भाग्य की आधारशिला होगी

हर पल
मेरे विचार - मेरे कर्म
ही मेरे भाग्य बनेंगे
और मैं ................. ।

5 comments:

Alpana Verma said...

'कर्म का प्रत्येक अंश
मेरे भाग्य की आधारशिला होगी'

-हमारे कर्म हमारा भाग्य लिखते हैं/बनाते हैं .
ग़ूढ ज्ञान की बात कह दी आप ने चन्द पंक्तियों में !

Unknown said...

सत्य का परिचय कराती आपकी ये रचना .......बहुत खूब

संजय भास्‍कर said...

devesh ji ne sahi kaha hai..
satya se prochaya karati rachaa

राज भाटिय़ा said...

हर पल
मेरे विचार - मेरे कर्म
ही मेरे भाग्य बनेंगे
और मैं
एक बहुत सुंदर संदेश देती आप की यह सुंदर कविता.
धन्यवाद

M VERMA said...

हर पल
मेरे विचार - मेरे कर्म
ही मेरे भाग्य बनेंगे
और मैं ................. ।
क्या दृढ़ निश्चय है
साधुवाद