Saturday, September 14, 2013

अभिशाप ...

आज का नेता 
लोकतंत्र के लिए 
बनते जा रहा है अभिशाप ?
क्योंकि -
वह 
सुबह-शाम 
करते रहता है 
जाति और धर्म का जाप ?? 

4 comments:

प्रवीण पाण्डेय said...

कब इस विषवृत्ति से बाहर आयेंगे हम।

सरिता भाटिया said...

आपकी इस प्रस्तुति की चर्चा कल सोमवार [16.09.2013]
चर्चामंच 1370 पर
कृपया पधार कर अनुग्रहित करें
सादर
सरिता भाटिया

कालीपद प्रसाद said...


कडुआ सच !
latest post कानून और दंड
atest post गुरु वन्दना (रुबाइयाँ)

sanny chauhan said...

सुन्दर प्रस्तुति

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