Monday, September 16, 2013

मुफलिसी ...

बड़ी अजीबो-गरीब कहानी है, मंजर भी तूफानी है
ऐंसे भी हालातों में,…… हमने लड़ने की ठानी है !
...
उसकी मजार पे, जलता चराग हमने कभी बुझता नहीं देखा
सच ! उसकी रूह भी 'उदय', उसकी तरह ही जिद्दी निकली ?
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शायद ! अब उसे, समझ में आ गया होगा 'उदय' 
कैसे होते हैं, … संत, … राम, … और बापू ??
न तो वो सूरत बदलेंगे, और न ही घमंड छोड़ेंगे 
दरअसल, वो आज अपनी असल औकात पे हैं ?
दो दिन की मुफलिसी भी उनसे सही नहीं गई 
उफ़ !…… ईमान का सौदा सरेआम कर गए ? 

4 comments:

Lalit Chahar said...

बहुत सुन्दर प्रस्तुति..

आज की चर्चा : ज़िन्दगी एक संघर्ष -- हिंदी ब्लॉगर्स चौपाल चर्चा : अंक-005

हिंदी दुनिया -- शुभारंभ

ARUN SATHI said...

साधू साधू

प्रवीण पाण्डेय said...

सच है

मदन मोहन सक्सेना said...

बेह्तरीन अभिव्यक्ति बहुत खूब
कभी यहाँ भी पधारें
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