Thursday, September 12, 2013

नरेन्द्र मोदी के नाम पर इतना घमासान क्यों ?

नरेन्द्र मोदी के नाम पर इतना घमासान क्यों ! 

आगामी लोकसभा चुनाव को लेकर लगभग सभी राजनैतिक दलों में अंदरुनी घमासान चल रहा है, सभी दल अपनी अपनी सफलता के लिए अपने स्तर पर उठा-पटक में लगे हुए हैं, इसी क्रम में भाजपा भी, जो वर्त्तमान में विपक्ष की भूमिका में है प्रधानमंत्री पद की उम्मीदवारी को लेकर घमासान के दौर से गुजर रही है ! 

यह घमासान गुजरात के मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी के प्रधानमंत्री पद की उम्मीदवारी की घोषणा को लेकर मचा हुआ है, जहाँ तक मेरा आंकलन है नरेन्द्र मोदी के नाम पर किसी भी भाजपाई को आपत्ति नहीं होनी चाहिए, और यदि कोई नाराजगी व्यक्त भी कर रहा है तो वह उचित नहीं है, क्योंकि वर्त्तमान भाजपाई कुनबे में ऐसा कोई दूसरा नेता उस कद-काठी का नहीं है जो भाजपा को आगामी लोकसभा चुनाव में करिश्माई बढ़त दिला सके ! 

यदि तुलनात्मक द्रष्ट्रीकोंण से भी देखें तो लालकृष्ण अडवानी, सुषमा स्वराज, अरुण जेटली, राजनाथ सिंह, मुरली मनोहर जोशी या कोई और, वर्त्तमान दौर में नरेन्द्र मोदी के सामने उन्नीस ही ठहरते हैं, यदि वरिष्ठ नेता अपनी वरिष्ठता का दम यूँ ही भरते रहे तो भाजपा आज जहाँ है वहाँ से आगे जाने की स्थिति में, कम से कम मुझे तो नजर नहीं आ रही है !

लेकिन हाँ, नरेन्द्र मोदी पर दाँव लगाना एक प्रकार से जुआ खेलने जैसा ही है, लेकिन फिर भी इसे पूर्णरूपेण जुआ खेलना नहीं कहा जा सकता, क्योंकि नरेन्द्र मोदी ने गुजरात में विकास के बलबूते अच्छी-खासी ख्याती भी अर्जित की है जिसकी चर्चा न सिर्फ देश में है वरन विदेशों में भी है जो अपने आप में नरेन्द्र मोदी के लिए प्लस प्वाइंट है ! 

इस नाते, नरेन्द्र मोदी नाम का व्यक्तित्व निसंदेह भाजपा को आगामी लोकसभा चुनाव में दो-तिहाई बहुमत सिर्फ अपने दम पर दिलवा भी सकता है तो दूसरी ओर अपनी हिंदुत्व की छवी के नाते लुटिया डुबो भी सकता है, … लेकिन, फिर भी, जहाँ तक मेरी व्यक्तिगत राय है भाजपा को जोखिम उठाना चाहिए, नरेन्द्र मोदी को प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित करना चाहिए !! 

( नोट :- जिन ब्लॉग / फेसबुक मित्र को यह समसामयिक लेख छापने योग्य प्रतीत होता है वह अपनी पत्र-पत्रिका में निसंकोच छाप सकता है, आभार ! )

3 comments:

प्रवीण पाण्डेय said...

अच्छा है आप शब्दों की संक्षिप्तता से बाहर आकर विश्लेषण व्यक्त कर रहे हैं। नेतृत्व सदा उसे ही मिलना चाहिये जिसमें क्षमता हो। यह सभी दलों के लिये लागू होता है। हर दल से श्रेष्ठतम प्रतिभागी हों जिससे देश को श्रेष्ठतम नेतृत्व मिले ।

Rahul said...

correct..

दिगम्बर नासवा said...

अब तो घोषणा हो गई ... अब आगे देखिये क्या होता है ...