Friday, June 9, 2017

उल्लू

जब तक ...
आप उल्लू नहीं बनेंगे
लक्ष्मी आपकी सवारी नहीं करेगी

यहाँ उल्लू बनने से मतलब, उल्लू पक्षी बनने से नहीं है
रीयल लाइफ उल्लू बनने से है

रीयल लाइफ उल्लू बोले तो ?

जिसे हर कोई
उल्लू .. उल्लू .. उल्लू .. पुकार सके
जिसके हाव-भाव उल्लू जैसे हों

जो सिर्फ
उल्लू ही न हो, वरन लोगों को उल्लू बनाने वाला भी हो
प्रदेश को उल्लू बनाने वाला हो, देश को उल्लू बनाने वाला हो !

Monday, June 5, 2017

दस्तूर

जब हम अंधकार से प्रकाश की ओर बढ़ते हैं
तब अंधकार .. हमें ...
रोकने ..
पकड़ने ..
जकड़ने ...
की पूरी कोशिश करता है

वह कभी नहीं चाहता
कि -
हम कभी प्रकाश में जाएँ ... प्रकाश में पहुंचें ....

वजह ... ?
कुछ ख़ास नहीं .. बस वैसी ही है
जैसे ...
बुराईयाँ .. हमें ... अच्छाईयों की ओर बढ़ने नहीं देतीं
शैतानी शक्तियाँ.. हमें दैवीय शक्तियों की ओर बढ़ने नहीं देतीं
बस ... कुछ ऐसा ही दस्तूर है ... कुदरत का

गर .. हमें ...
सदैव ... प्रकाश में ...
अच्छाईयों में ... दैवीय आभा मण्डल में .. रहना है तो
हमें ... सदैव .. सजग रहना होगा
नहीं तो ...
हम .. कभी-भी ...
अंधकार से .. मुक्त नहीं हो पाएंगे ... ???

Thursday, June 1, 2017

सफ़र

बहुत दूर से .. बहुत दूर तक का .. सफ़र है
पाँव के छाले
राह के कंकड़
कोई मायने नहीं रखते,

गर .. ठहरे ...
थके ..
रुके ..
तो समझो गये .. !

क्यों ?
क्योंकि -
वक्त .. और .. मंजिलें ...
कभी .. किसी का .. इंतज़ार नहीं करतीं ... !

Monday, May 29, 2017

मील के पत्थर


यूँ तो इल्जाम लगाने वालों ने कोई कसर नहीं छोड़ी
मगर ... तेरी आँखों में बेगुनाही झलक रही थी मेरी !
...
उफ्फ .. सच्च .. वक्त गुजरा कैसे ! .. हमें भी पता नहीं
लफ्फाजियों का दौर था, .... लफ्फाजियों का दौर है !!
...
वो कुछ इस कदर लिपटे दौड़ के जिस्म से मेरे,
कि ... फिर ..... मैं मैं न रहा ..... वो वो न रहे !
...
फक्कड़ थे तो 'खुदा' थे
सल्तनत क्या मिली .. इंसा न रहे !
...
बस .. कुछ यूँ समझ लो
चापलूसी काम आ गई,
वर्ना ! आज वो ..
औंधे मुँह पड़े होते .... ?
...
अब तू
तजुर्बे-औ-हुनर की बात न कर,
कभी हम भी
मील के पत्थर थे हुजूर ....... ? 

Friday, May 26, 2017

फरेबी

कौन जानता था कि
वो
कुछ इस तरह मिजाज बदल लेंगे

पहले तो ..
घंटों लिपटे रहेंगे
दो जिस्म औ इक जान की तरह

और फिर
मुँह मोड़ लेंगे
इक अजनबी की तरह

लिपटना .. मुँह मोड़ लेना .. फिर .. पहचानना नहीं
कभी-कभी तो
उनकी इस अदा पे भी प्यार आता है

मगर सोचता हूँ
ऐसे प्यार का मतलब ही क्या .. !
जो
फरेबी हो ... ?