"क्या प्यार इसी को कहते हैं ?"
पुस्तक कम्पलीट हुई मित्रों ... दो-तीन दिन में करेक्शन का काम पूरा करना है ... फिर कोशिश करेंगे शायद अपने जैसे नौसिखिये लेखकों को भी पब्लिशर मिल जाए ...
गर नहीं मिला तब ... अपुन के पास "फेसबुक व ब्लॉग रूपी इंटरनेशनल मंच" तो उपलब्ध ही हैं ...
देखेंगे, पर एक कोशिश जरुर करेंगे प्रकाशन के लिए / यदि आपके पास कोई सुझाव हो प्रकाशन सम्बन्धी तो अवश्य दें ...
शाम-रात से पुन: अपने पुराने तेवरों पर आ जायेंगे ... तब तक के लिए पुस्तक के अंशों की अंतिम किश्त ...
"... यार नेहा इस समस्या का समाधान तो सेक्सुअल रिलेशन आई मीन सेक्सुअल इंटरकोर्स पर जाकर ख़त्म होता है, और जहां तक अपुन का दिमाग दौड़ रहा है इस "बोबी डार्लिंग" जैसी समस्या का समाधान कोई और हो भी नहीं सकता ... पर सेक्सुअल इंटरकोर्स भी अपने आप में एक समस्या तो है ही भले छोटी ही सही ... लगता है कि दो के झगड़े में तीसरे का भला होना तय है, आई मीन प्रेम को "सेक्स" का मजा लेने का सुनहरा मौक़ा, वो भी बिना मेहनत के मिलने वाला है ... चलो ठीक है, क्या फर्क पड़ता है ... पर सवाल ये है कि किसके सांथ ? ..."
"चलो अच्छा हुआ, जो तुम मेरे दर पे नहीं आए / तुम झुकते नहीं, और मैं चौखटें ऊंची कर नही पाता !"
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Wednesday, November 16, 2011
Tuesday, November 15, 2011
तूफानी रात ...
नव रचना की ओर अग्रसर पुस्तक - "क्या प्यार इसी को कहते हैं ?" ... इसी पुस्तक के कुछ अंश -
" ...
तूफानी रात तो जैसे तैसे गुजर गई, पर दोनों ... नेहा और प्रेम अंजान रहे कि क्या हुआ, क्यों रात तूफ़ान की तरह करवट बदलते रही ... एक तरफ नेहा तो दूसरी तरफ प्रेम ... दोनों के दोनों सुबह होने पर भी कुछ बेचैनी महसूस कर रहे थे ... दरअसल बेचैनी का सबब कुछ और नहीं था उन दोनों के अन्दर समाया हुआ एक दूसरे के प्रति प्यार था जिससे शायद वे दोनों ही अंजान थे ... नेहा अपने दोस्त प्रेम को अपनी सहेली के सामने नीचा न देखना पड़े शायद इसलिए वह उसे "किस" करने की ट्रेनिंग दे देती है ... वह इस बात से अंजान रहती है कि एक दोस्त की भी कुछ मर्यादाएं होती हैं जिसे वह दोस्त के रूप में पार नहीं कर सकती ... किन्तु वह खुद यह नहीं जानती है कि वह खुद भी प्रेम से प्यार करती है शायद प्यार होने की अंदरुनी ताकत ही उसे प्रेम को "किस" करना सिखाने को मजबूर कर देती है ... ठीक इसी प्रकार जहां प्रेम, जो निधी के छुअन मात्र से झनझनाने लगता था वह नेहा के एक बार कहने व समझाने पर नमूने के रूप में हिम्मत पूर्वक नेहा को "किस" कर लेता है ... यह दोनों के बीच बचपन की दोस्ती के दौरान अन्दर ही अन्दर पनप रहे प्यार का ही नतीजा है जो दोनों एक दूसरे के लिए कुछ भी करने को तैयार हो गए तथा "किस" लेने व देने में सफल भी रहे ..."
लेखन जारी है पूर्णता की ओर ...
" ...
तूफानी रात तो जैसे तैसे गुजर गई, पर दोनों ... नेहा और प्रेम अंजान रहे कि क्या हुआ, क्यों रात तूफ़ान की तरह करवट बदलते रही ... एक तरफ नेहा तो दूसरी तरफ प्रेम ... दोनों के दोनों सुबह होने पर भी कुछ बेचैनी महसूस कर रहे थे ... दरअसल बेचैनी का सबब कुछ और नहीं था उन दोनों के अन्दर समाया हुआ एक दूसरे के प्रति प्यार था जिससे शायद वे दोनों ही अंजान थे ... नेहा अपने दोस्त प्रेम को अपनी सहेली के सामने नीचा न देखना पड़े शायद इसलिए वह उसे "किस" करने की ट्रेनिंग दे देती है ... वह इस बात से अंजान रहती है कि एक दोस्त की भी कुछ मर्यादाएं होती हैं जिसे वह दोस्त के रूप में पार नहीं कर सकती ... किन्तु वह खुद यह नहीं जानती है कि वह खुद भी प्रेम से प्यार करती है शायद प्यार होने की अंदरुनी ताकत ही उसे प्रेम को "किस" करना सिखाने को मजबूर कर देती है ... ठीक इसी प्रकार जहां प्रेम, जो निधी के छुअन मात्र से झनझनाने लगता था वह नेहा के एक बार कहने व समझाने पर नमूने के रूप में हिम्मत पूर्वक नेहा को "किस" कर लेता है ... यह दोनों के बीच बचपन की दोस्ती के दौरान अन्दर ही अन्दर पनप रहे प्यार का ही नतीजा है जो दोनों एक दूसरे के लिए कुछ भी करने को तैयार हो गए तथा "किस" लेने व देने में सफल भी रहे ..."
लेखन जारी है पूर्णता की ओर ...
Monday, November 14, 2011
तुझे ही "किस" करनी चाहिए ...
अपुन भी पुस्तक लिख रहा हूँ पुस्तक का टाइटल है - "क्या प्यार इसी को कहते हैं ?" ... इसी पुस्तक के कुछ अंश -
"...
नेहा - आजा यार, क्यूँ टेंशन ले रहा है देखते हैं जो होगा देखा जाएगा, वैसे भी "किस" लेने या देने की ही तो बात है तू काय को टेंशन ले रहा है ... अगर टेंशन किसी को लेना चाहिए तो निधी को लेना चाहिए, क्योंकि वह एक लड़की है ... और तू है कि तू टेंशन में है और वह तुझे देख देख के मजे ले रही है ... एक काम कर, तू मन बना ले, किसी पिक्चर का "किस" सीन याद कर, और याद करते करते "किस" ले लेना या दे देना !
प्रेम - नेहा तू भी यार पिक्चर और हकीकत में जमीं आसमान का अंतर होता है, और तू तो जानती है किसी और लड़की के छूने मात्र से मेरा क्या हाल होता है ... क्या किया जाए, कुछ तो आज तय करना ही पडेगा !
नेहा - मैं एक दोस्त होने के नाते तुझे यह ही सलाह दे सकती हूँ कि तुझे डरने की जरुरत नहीं है, तू ये डिसाइड कर ले कि - तू "किस" देगा या लेगा, फिर मैं तुझे कुछ हिंट देती हूँ, हालांकि मुझे भी कोई प्रेक्टिकल अनुभव नहीं है यह तू भी जानता है !
प्रेम - अच्छा ये बता मुझे क्या करना चाहिए ?
नेहा - मेरी तो सलाह यह है कि तुझे ही "किस" करनी चाहिए !
प्रेम - अब जैसा तू बोलती है वैसा मान लेता हूँ ... वैसे भी मैं लड़का हूँ इसलिए मुझे ही "किस" करना चाहिए ... मैं मन बना रहा हूँ और तू मुझे सोच समझ कर ऐंसे हिंट दे ताकि निधी के सामने मुझे शर्मिन्दा न होना पड़े !
नेहा - ये हुई न कोई बात ... चल एक काम कर, थोड़ी देर के लिए तू सोच कि मैं निधी हूँ और तेरे सामने खड़ी हूँ बता कैसे "किस" करेगा !
प्रेम नाक-मुंह सिकोड़ते हुए हिम्मत कर नेहा को निधी समझ कर आगे बढ़ता है किन्तु उसके सामने पहुंचते ही उसके हाँथ कांपने लगते हैं ...
नेहा - अरे बुद्धू, तू ऐंसे ही डरेगा तो कैसे "किस" करेगा ... हिम्मत कर, और बिना डरे आके ले ले "किस" !
प्रेम एक बार फिर हिम्मत कर नेहा को निधी समझ "किस" करने की कोशिश करता है किन्तु फिर से वह सहम के रह जाता है, इस बार नेहा को गुस्सा आता है और ...
... "
"...
नेहा - आजा यार, क्यूँ टेंशन ले रहा है देखते हैं जो होगा देखा जाएगा, वैसे भी "किस" लेने या देने की ही तो बात है तू काय को टेंशन ले रहा है ... अगर टेंशन किसी को लेना चाहिए तो निधी को लेना चाहिए, क्योंकि वह एक लड़की है ... और तू है कि तू टेंशन में है और वह तुझे देख देख के मजे ले रही है ... एक काम कर, तू मन बना ले, किसी पिक्चर का "किस" सीन याद कर, और याद करते करते "किस" ले लेना या दे देना !
प्रेम - नेहा तू भी यार पिक्चर और हकीकत में जमीं आसमान का अंतर होता है, और तू तो जानती है किसी और लड़की के छूने मात्र से मेरा क्या हाल होता है ... क्या किया जाए, कुछ तो आज तय करना ही पडेगा !
नेहा - मैं एक दोस्त होने के नाते तुझे यह ही सलाह दे सकती हूँ कि तुझे डरने की जरुरत नहीं है, तू ये डिसाइड कर ले कि - तू "किस" देगा या लेगा, फिर मैं तुझे कुछ हिंट देती हूँ, हालांकि मुझे भी कोई प्रेक्टिकल अनुभव नहीं है यह तू भी जानता है !
प्रेम - अच्छा ये बता मुझे क्या करना चाहिए ?
नेहा - मेरी तो सलाह यह है कि तुझे ही "किस" करनी चाहिए !
प्रेम - अब जैसा तू बोलती है वैसा मान लेता हूँ ... वैसे भी मैं लड़का हूँ इसलिए मुझे ही "किस" करना चाहिए ... मैं मन बना रहा हूँ और तू मुझे सोच समझ कर ऐंसे हिंट दे ताकि निधी के सामने मुझे शर्मिन्दा न होना पड़े !
नेहा - ये हुई न कोई बात ... चल एक काम कर, थोड़ी देर के लिए तू सोच कि मैं निधी हूँ और तेरे सामने खड़ी हूँ बता कैसे "किस" करेगा !
प्रेम नाक-मुंह सिकोड़ते हुए हिम्मत कर नेहा को निधी समझ कर आगे बढ़ता है किन्तु उसके सामने पहुंचते ही उसके हाँथ कांपने लगते हैं ...
नेहा - अरे बुद्धू, तू ऐंसे ही डरेगा तो कैसे "किस" करेगा ... हिम्मत कर, और बिना डरे आके ले ले "किस" !
प्रेम एक बार फिर हिम्मत कर नेहा को निधी समझ "किस" करने की कोशिश करता है किन्तु फिर से वह सहम के रह जाता है, इस बार नेहा को गुस्सा आता है और ...
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माल ... खरीद लो ...
अपुन भी पुस्तक लिख रहा हूँ पुस्तक का टाइटल है - "क्या प्यार इसी को कहते हैं ?" ... इसी पुस्तक के कुछ अंश -
" ...
प्रेम - बस अभी अभी आया हूँ लगभग पंद्रह मिनट हुए होंगे ... चूंकि तुम गहरी नींद में थी इसलिए तुम्हें डिस्टर्व करना उचित नहीं समझा और यहाँ कंप्यूटर चालू कर फेसबुक पर कुछ नया पढ़ने बैठ गया !
नेहा - वाह, क्या बात है आजकल तू फेसबुक पर भी ... क्या माजरा है यार, कुछ बताता क्यूँ नहीं ... चल छोड़ ये बता क्या मिला तुझे फेसबुक पर !
प्रेम - बस अभी अभी एक युवा शायर की दो पंक्तियाँ पढ़ रहा था ... सुन तू भी क्या लिखा है शायर ने -
"सच ! हमने यूँ ही कह दिया, क्या माल है
वो पलट के आ गए, कहने लगे खरीद लो !"
यार नेहा ये बता, क्या है इसका मतलब, लाइनें तो बहुत ही इंटरेस्टिंग लग रही हैं किन्तु कुछ समझ से परे हैं !
नेहा - यार रुक मैं फ्रेस होके आती हूँ, चाय पिएगा या नहीं ... अब हाँ या न क्या, मेरे सांथ पी लेना, जा शंभू काका को बोल चाय के लिए तब तक मैं बाथरूम से आती हूँ !
लगभग पांच मिनट में नेहा फ्रेस होकर बाथरूम से निकली तब तक चाय भी आ गई थी, चाय पीते पीते ...
नेहा - दिखा कहाँ लिखी हैं लाइनें, मैं भी तो देखूं ज़रा ... वाह क्या बात है -
"सच ! हमने यूँ ही कह दिया, क्या माल है
वो पलट के आ गए, कहने लगे खरीद लो !"
यार प्रेम ये तो बहुत ही गंभीर टाईप की लाईने, आई मीन शेर-शायरी लग रही हैं, ये अपुन लोगों के समझ से सचमुच परे है, पर हैं इंटरेस्टिंग ... माल ... खरीद लो ... चल छोड़ जाने दे, किसी दिन दिमाग खपायेंगे, आज सुबह सुबह मूड नहीं है और वैसे भी आज सन्डे है कौन मगज मारी करे ... बता क्या प्रोग्राम है आज !
... "
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प्रेम - बस अभी अभी आया हूँ लगभग पंद्रह मिनट हुए होंगे ... चूंकि तुम गहरी नींद में थी इसलिए तुम्हें डिस्टर्व करना उचित नहीं समझा और यहाँ कंप्यूटर चालू कर फेसबुक पर कुछ नया पढ़ने बैठ गया !
नेहा - वाह, क्या बात है आजकल तू फेसबुक पर भी ... क्या माजरा है यार, कुछ बताता क्यूँ नहीं ... चल छोड़ ये बता क्या मिला तुझे फेसबुक पर !
प्रेम - बस अभी अभी एक युवा शायर की दो पंक्तियाँ पढ़ रहा था ... सुन तू भी क्या लिखा है शायर ने -
"सच ! हमने यूँ ही कह दिया, क्या माल है
वो पलट के आ गए, कहने लगे खरीद लो !"
यार नेहा ये बता, क्या है इसका मतलब, लाइनें तो बहुत ही इंटरेस्टिंग लग रही हैं किन्तु कुछ समझ से परे हैं !
नेहा - यार रुक मैं फ्रेस होके आती हूँ, चाय पिएगा या नहीं ... अब हाँ या न क्या, मेरे सांथ पी लेना, जा शंभू काका को बोल चाय के लिए तब तक मैं बाथरूम से आती हूँ !
लगभग पांच मिनट में नेहा फ्रेस होकर बाथरूम से निकली तब तक चाय भी आ गई थी, चाय पीते पीते ...
नेहा - दिखा कहाँ लिखी हैं लाइनें, मैं भी तो देखूं ज़रा ... वाह क्या बात है -
"सच ! हमने यूँ ही कह दिया, क्या माल है
वो पलट के आ गए, कहने लगे खरीद लो !"
यार प्रेम ये तो बहुत ही गंभीर टाईप की लाईने, आई मीन शेर-शायरी लग रही हैं, ये अपुन लोगों के समझ से सचमुच परे है, पर हैं इंटरेस्टिंग ... माल ... खरीद लो ... चल छोड़ जाने दे, किसी दिन दिमाग खपायेंगे, आज सुबह सुबह मूड नहीं है और वैसे भी आज सन्डे है कौन मगज मारी करे ... बता क्या प्रोग्राम है आज !
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Sunday, November 13, 2011
दिल का धड़कना ...
अपुन भी पुस्तक लिख रहा हूँ पुस्तक का टाइटल है - "क्या प्यार इसी को कहते हैं ?" ... इसी पुस्तक के कुछ अंश -
" ...
रात में बिस्तर पर पड़े पड़े नेहा मन में सोचती है कि - क्या अजब इत्तफाक है कि एक तरफ प्रेम का दिल निधी की टच से झनझना रहा है और वहीं दूसरी ओर उसे खुद पता नहीं है कि ऐंसा क्यों हो रहा है ... और तो और निधी भी अंजान है, कल इस मसले पर गहन सोच-विचार करना पडेगा कि ऐंसा क्यों हो रहा है, कहीं ऐंसा न हो निधी और प्रेम दोनों अंजान हों तथा दोनों एक-दूसरे को लम्बे समय से पसंद कर रहे हों ... पर इतना तो तय है कि - दिल का धड़कना ... किसी के बस में नहीं होता, जब वह धड़कता है तो धड़कते चलता है ... खुशी की बात तो ये है कि अपुन का बुद्धू दोस्त प्रेम ... चलो ठीक है यदि उसे प्यार हो भी रहा है तो ये खुशी की बात है, पर निधी ... निधी को क्यूँ महसूस नहीं हो रहा, कहीं ऐंसा तो नहीं वह कुछ छिपा रही है ... खैर देखते हैं, आगे क्या होता है ! ... कब तक कोई बात दिल में छिपी रहेगी, आज नहीं तो कल उसे बाहर तो आना ही है ... और रही बात प्यार-व्यार की तो, कौन-सा अपुन भी इस मामले में पीएचडी की डिग्री लेके बैठा है, जैसे वे दोनों नौसिखिये, वैसे ही अपुन भी ... पर दिल का धड़कना, झनझना जाना ... कुछ अद्भुत सा है ... क्या प्यार इसी को कहते हैं ? ... अब इस सवाल का जवाब तो वक्त ही देगा ... देखते हैं कल क्या कहानी होती है ... सो जाओ नेहा ... गुड नाईट !
... "
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रात में बिस्तर पर पड़े पड़े नेहा मन में सोचती है कि - क्या अजब इत्तफाक है कि एक तरफ प्रेम का दिल निधी की टच से झनझना रहा है और वहीं दूसरी ओर उसे खुद पता नहीं है कि ऐंसा क्यों हो रहा है ... और तो और निधी भी अंजान है, कल इस मसले पर गहन सोच-विचार करना पडेगा कि ऐंसा क्यों हो रहा है, कहीं ऐंसा न हो निधी और प्रेम दोनों अंजान हों तथा दोनों एक-दूसरे को लम्बे समय से पसंद कर रहे हों ... पर इतना तो तय है कि - दिल का धड़कना ... किसी के बस में नहीं होता, जब वह धड़कता है तो धड़कते चलता है ... खुशी की बात तो ये है कि अपुन का बुद्धू दोस्त प्रेम ... चलो ठीक है यदि उसे प्यार हो भी रहा है तो ये खुशी की बात है, पर निधी ... निधी को क्यूँ महसूस नहीं हो रहा, कहीं ऐंसा तो नहीं वह कुछ छिपा रही है ... खैर देखते हैं, आगे क्या होता है ! ... कब तक कोई बात दिल में छिपी रहेगी, आज नहीं तो कल उसे बाहर तो आना ही है ... और रही बात प्यार-व्यार की तो, कौन-सा अपुन भी इस मामले में पीएचडी की डिग्री लेके बैठा है, जैसे वे दोनों नौसिखिये, वैसे ही अपुन भी ... पर दिल का धड़कना, झनझना जाना ... कुछ अद्भुत सा है ... क्या प्यार इसी को कहते हैं ? ... अब इस सवाल का जवाब तो वक्त ही देगा ... देखते हैं कल क्या कहानी होती है ... सो जाओ नेहा ... गुड नाईट !
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कहीं हार्ट फ़ैल न हो जाए ...
अपुन भी पुस्तक लिखना शुरू किया हूँ पुस्तक का टाइटल है - "क्या प्यार इसी को कहते हैं ?" ... इसी पुस्तक के कुछ अंश -
" ...
निधी - उस टाईप बोले तो ... ये टाईप क्या होता है यार !
नेहा - तू भी, अब क्या तुझे टाईप भी समझाना पडेगा !
निधी - नहीं यार, मैं तो सोच रही थी कि वो तेरा उस टाईप का ही फ्रेंड है !
नेहा - चल छोड़ मस्ती मत कर, जितना बोलती हूँ उतना कर, बाद में समझाऊंगी क्यों बोल रही हूँ ऐंसा करने के लिए !
निधी - ठीक है, जैसा बोलती है कर देती हूँ मेरा क्या जाता है ... टकराने से कौन-सा वो मेरा कुछ ले जाएगा, इशारा कर उसे आने के लिए मैं आज टकरा के उसकी बैंड बजा देती हूँ !
बर्थ डे पार्टी की भीड़ में नेहा का इशारा पाकर प्रेम उसकी ओर आने लगता है इसी बीच निधी अंजान बनते हुए उसके कंधे से कंधा टकराते हुए आगे निकल जाती है ... यह देख नेहा मन ही मन मुस्कुराने लगती है, इसी बीच प्रेम उसके सामने पहुँच जाता है ...
प्रेम - नेहा, चल यार चल चलते हैं अब यहाँ एक मिनट भी नहीं रुकेंगे !
नेहा - क्यों, क्या हो गया, अभी तो पार्टी शुरू हुई है नाचना-गाना, धूम-धडाका तो अभी बाकी है !
प्रेम - यार यहाँ मेरी जान निकल रही है और तुझे नाचने-गाने की पडी है, देख मेरे दिल की धड़कन कितना तेज धडाधडा रही है, यहाँ रुका रहा तो कहीं मेरी जान ही न निकल जाए !
नेहा - तू भी यार, फर्स्ट ईयर में पहुँच गया है और आज भी वही बच्चों जैसी बातें कर रहा है, पार्टी में आए हैं नाच-गाना तो होगा ही, एक काम कर इतनी सारी लड़कियाँ हैं किसी एक को पसंद कर, मैं उससे अभी तेरी दोस्ती करा देती हूँ !
प्रेम - नेहा तू समझती क्यूँ नहीं है यार, अभी अभी निधी मुझसे अनजाने में टकरा गई है उसी से मेरी दम फूल रही है ... छूकर देख मेरे दिल को, कहीं हार्ट फ़ैल न हो जाए ... और तू कहती है कि किसी लड़की से दोस्ती करा देती हूँ, क्या मेरी जान लेकर ही तू दम लेगी !
नेहा - अच्छा चल निधी से ही तेरी दोस्ती करा देती हूँ !
प्रेम - मैं तेरे हाँथ जोड़ता हूँ मेरी माँ ... मुझे न तो निधी में इंटरेस्ट है, और न ही किसी दूसरी लड़की में ... चल घर निकल लेते हैं !
... "
" ...
निधी - उस टाईप बोले तो ... ये टाईप क्या होता है यार !
नेहा - तू भी, अब क्या तुझे टाईप भी समझाना पडेगा !
निधी - नहीं यार, मैं तो सोच रही थी कि वो तेरा उस टाईप का ही फ्रेंड है !
नेहा - चल छोड़ मस्ती मत कर, जितना बोलती हूँ उतना कर, बाद में समझाऊंगी क्यों बोल रही हूँ ऐंसा करने के लिए !
निधी - ठीक है, जैसा बोलती है कर देती हूँ मेरा क्या जाता है ... टकराने से कौन-सा वो मेरा कुछ ले जाएगा, इशारा कर उसे आने के लिए मैं आज टकरा के उसकी बैंड बजा देती हूँ !
बर्थ डे पार्टी की भीड़ में नेहा का इशारा पाकर प्रेम उसकी ओर आने लगता है इसी बीच निधी अंजान बनते हुए उसके कंधे से कंधा टकराते हुए आगे निकल जाती है ... यह देख नेहा मन ही मन मुस्कुराने लगती है, इसी बीच प्रेम उसके सामने पहुँच जाता है ...
प्रेम - नेहा, चल यार चल चलते हैं अब यहाँ एक मिनट भी नहीं रुकेंगे !
नेहा - क्यों, क्या हो गया, अभी तो पार्टी शुरू हुई है नाचना-गाना, धूम-धडाका तो अभी बाकी है !
प्रेम - यार यहाँ मेरी जान निकल रही है और तुझे नाचने-गाने की पडी है, देख मेरे दिल की धड़कन कितना तेज धडाधडा रही है, यहाँ रुका रहा तो कहीं मेरी जान ही न निकल जाए !
नेहा - तू भी यार, फर्स्ट ईयर में पहुँच गया है और आज भी वही बच्चों जैसी बातें कर रहा है, पार्टी में आए हैं नाच-गाना तो होगा ही, एक काम कर इतनी सारी लड़कियाँ हैं किसी एक को पसंद कर, मैं उससे अभी तेरी दोस्ती करा देती हूँ !
प्रेम - नेहा तू समझती क्यूँ नहीं है यार, अभी अभी निधी मुझसे अनजाने में टकरा गई है उसी से मेरी दम फूल रही है ... छूकर देख मेरे दिल को, कहीं हार्ट फ़ैल न हो जाए ... और तू कहती है कि किसी लड़की से दोस्ती करा देती हूँ, क्या मेरी जान लेकर ही तू दम लेगी !
नेहा - अच्छा चल निधी से ही तेरी दोस्ती करा देती हूँ !
प्रेम - मैं तेरे हाँथ जोड़ता हूँ मेरी माँ ... मुझे न तो निधी में इंटरेस्ट है, और न ही किसी दूसरी लड़की में ... चल घर निकल लेते हैं !
... "
Saturday, November 12, 2011
झनझना रहा होता ...
अपुन भी पुस्तक लिखना शुरू कर दिया हूँ पुस्तक का टाइटल है - "क्या प्यार इसी को कहते हैं ?" ... इसी पुस्तक के अंश -
" ...
प्रेम - नेहा, आज अजीब सी बेचैनी हो रही है समझ में नहीं आ रहा है कि - ऐसा क्यूँ हो रहा है !
नेहा - क्या हुआ, खुल के बता, क्या बात है !
प्रेम - क्या बात है, यही तो समझ में नहीं आ रही है !
नेहा - अरे यार, कुछ तो बता क्या बात हुई है, आई मीन क्या बेचैनी हो रही है !
प्रेम - यार दोपहर में तुम्हारी सहेली निधी, आई मीन केन्टीन में चाय पीते समय उसका हाँथ मेरे हाँथ से टकरा गया था, तब से लेकर अब तक, लगभग ढाई-तीन घंटे हो गए हैं, हाँथ का वह हिस्सा जहां उसका हाँथ टकराया था वह झनझना रहा है, और तो और मेरे दिल की धड़कनें भी तेजी से धड़क रही हैं, क्या हुआ है समझ से परे है !
नेहा - अरे बुद्धु, तू भी ... इतनी छोटी-सी बात पे झनझना रहा है, छोड़ उसे, कुछ भी नहीं है !
प्रेम - नहीं यार, तब से वही सीन बार बार याद आ रहा है, और तो और मेरे दिल को धड़का भी रहा है !
नेहा - चल फोन रख, आधा घंटे में मैं आ रही हूँ तेरे घर, तैयार रहना, आज निधी का "बर्थ डे" है उसके घर चलना है उसने तुझे भी इनवाईट किया है !
आधा घंटे के बाद निधी के पहुंचने पर ...
निधी - चल प्रेम चल चलते हैं टाईम हो गया है, मैं रस्ते में सोच रही थी कि - जब तेरा हाँथ निधी के हाँथ से टच हो जाने पर अभी तक झनझना रहा है, सोच अगर वो तेरे से लिपट गई होती तो तेरा क्या हाल होता ... अभी तू पूरा का पूरा झनझना रहा होता, आई मीन बाईव्रेट मोड में चला गया होता !
... "
" ...
प्रेम - नेहा, आज अजीब सी बेचैनी हो रही है समझ में नहीं आ रहा है कि - ऐसा क्यूँ हो रहा है !
नेहा - क्या हुआ, खुल के बता, क्या बात है !
प्रेम - क्या बात है, यही तो समझ में नहीं आ रही है !
नेहा - अरे यार, कुछ तो बता क्या बात हुई है, आई मीन क्या बेचैनी हो रही है !
प्रेम - यार दोपहर में तुम्हारी सहेली निधी, आई मीन केन्टीन में चाय पीते समय उसका हाँथ मेरे हाँथ से टकरा गया था, तब से लेकर अब तक, लगभग ढाई-तीन घंटे हो गए हैं, हाँथ का वह हिस्सा जहां उसका हाँथ टकराया था वह झनझना रहा है, और तो और मेरे दिल की धड़कनें भी तेजी से धड़क रही हैं, क्या हुआ है समझ से परे है !
नेहा - अरे बुद्धु, तू भी ... इतनी छोटी-सी बात पे झनझना रहा है, छोड़ उसे, कुछ भी नहीं है !
प्रेम - नहीं यार, तब से वही सीन बार बार याद आ रहा है, और तो और मेरे दिल को धड़का भी रहा है !
नेहा - चल फोन रख, आधा घंटे में मैं आ रही हूँ तेरे घर, तैयार रहना, आज निधी का "बर्थ डे" है उसके घर चलना है उसने तुझे भी इनवाईट किया है !
आधा घंटे के बाद निधी के पहुंचने पर ...
निधी - चल प्रेम चल चलते हैं टाईम हो गया है, मैं रस्ते में सोच रही थी कि - जब तेरा हाँथ निधी के हाँथ से टच हो जाने पर अभी तक झनझना रहा है, सोच अगर वो तेरे से लिपट गई होती तो तेरा क्या हाल होता ... अभी तू पूरा का पूरा झनझना रहा होता, आई मीन बाईव्रेट मोड में चला गया होता !
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