Tuesday, September 10, 2013

बैकुंठ की चाहत ...

आ भी जाती, तो क्या होता, हिचकी ही तो है
कौन सा उन्हें … वो अपने संग लिए आती ?

सच ! हम कैसे उसे धर्मात्मा मान लें 'उदय'
आखिर, बलात्कार का इल्जाम है उस पर ?

सवाल ये नहीं है 'उदय', कि वो कुछ छिपा रहे हैं
सवाल ये है, कि वो ….…… क्यूँ छिपा रहे हैं ?

जब उसने, आते ही ............ मुझे गुरु कहा था 'उदय'
मैं समझ गया था, मुझे अपना चेला बनाने आया है ?

सच ! एक समय, थी तो उन्हें बैकुंठ की चाहत 'उदय'
पर, खुद ही बाहर निकलने को छट-पटा रहे हैं आज ?

3 comments:

ब्लॉग बुलेटिन said...

ब्लॉग बुलेटिन की आज की बुलेटिन पैटर्न टैंकों को बर्बाद करने वाले परमवीर को सलाम - ब्लॉग बुलेटिन मे आपकी पोस्ट को भी शामिल किया गया है ... सादर आभार !

सु..मन(Suman Kapoor) said...

वाह ..उदय जी , बहुत सुन्दर

दिगम्बर नासवा said...

सवाल ये नहीं है 'उदय', कि वो कुछ छिपा रहे हैं
सवाल ये है, कि वो ….…… क्यूँ छिपा रहे हैं ?

सच कहा ... मतलब जानना भी जरूरी है ...