Sunday, September 8, 2013

मौसेरे भाई ...

दुःख इस बात का है 'उदय' 
कि - 
अब भी 
वो सुधरने को तैयार नहीं हैं, 
और फिर भी 
न जाने कितने 
उन्हीं पे, उन्हीं लोगों पे 
आस लगाए हैं 
उन्हें ही, तक रहे हैं 
जबकि -
सब जानते हैं 
वे चोर-चोर मौसेरे भाई हैं ?

5 comments:

Anonymous said...

बहुत सुन्दर प्रस्तुति.. हिंदी लेखक मंच पर आप को सूचित करते हुए हर्ष हो रहा है कि आपके लिए यह हिंदी लेखक मंच तैयार है। हम आपका सह्य दिल से स्वागत करते है। कृपया आप भी पधारें, आपका योगदान हमारे लिए "अमोल" होगा |

मैं रह गया अकेला ..... - हिंदी ब्लॉगर्स चौपाल - अंकः003

Rajesh Kumari said...

आपकी इस उत्कृष्ट प्रविष्टि की चर्चा कल मंगलवार १० /९ /१३ को राजेश कुमारी द्वारा चर्चा मंच पर की जायेगी आपका वहाँ हार्दिक स्वागत है ।

प्रवीण पाण्डेय said...

सच है..

Pratibha Verma said...

बहुत सुन्दर प्रस्तुति। ।

Pratibha Verma said...

बहुत सुन्दर प्रस्तुति। ।