Saturday, August 18, 2012

अफवाहें ...


कूटनीति ... 
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न सुनेंगे, न कुछ कहेंगे 
न सजा देंगे 
न बक्शेंगे 
उन्हें खडा रखेंगे !
रखे रहेंगे !!
बस - 
इस तरह उन्हें थका देंगे !!!
वो हार जाएंगे ... 
और हम ??? 
... 
दाग ...
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लो 'उदय', आज फिर 
उनके 
दामन पे दाग नजर आए हैं 
अब देखना ये है 
वो बचने को 
करते क्या-क्या उपाय हैं ? 
... 
अफवाहें ... 
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अफवाहों के जहर ... 
फिजाओं में !
किसी की सजा किसी और को !!
क्यों ?
कम से कम, 
हवाओं को तो बक्श दो यारो ?? 

2 comments:

Mukesh Agrawal said...

शानदार प्रस्तुती उदय जी ...

प्रवीण पाण्डेय said...

भारत को बख्श दो..