Tuesday, January 17, 2012

... उंगली काँप जाती है !

ऐंसी क्या बात हुई ? जिसपे तुझे एतराज है हुआ
इससे पहले भी तो मैंने, तेरे होंठों से बात पूँछी है !
...
'रब' जाने है, बहानों से कितना परहेज है हमें
वर्ना, झूठ बयानी में, जाता क्या है ?
...
'खुदा' की पाबंदियां, सर-आँखों पे रखते सभी है
मगर उन्हें हम मानते कब हैं ?
...
सच ! जी तो चाहता है, ढेरों ख़त लिख दें सनम को
मगर जब नाम लिखते हैं, तो उंगली काँप जाती है !
...
इश्क तो, हम भी करते हैं 'उदय'
ये और बात है, कि हम बयां नहीं करते !

4 comments:

परमजीत सिँह बाली said...

बहुत बढिया!!

प्रवीण पाण्डेय said...

बयां बयां का खेल बयां करने में चूका..

रश्मि प्रभा... said...

ishq to aankhon se bayaan hota hai ...

***Punam*** said...

sheron ka andaaz.....
.......................nirala hai...!