Wednesday, December 7, 2011

दरवाजा ...

मैं पहुँच गया हूँ
वहां तक
जहां से, और आगे
बढ़ पाना
मुमकिन नहीं है !

क्यों, क्योंकि -
आगे दरवाजा है
जैसे ही
दरवाजा खुलेगा
हम होंगे
आमने - सामने !

ठीक उसी पल
तुम मुझमें -
और मैं तुममें
समाकर
देखते ही देखते
एक हो जाएंगे !!

2 comments:

प्रवीण पाण्डेय said...

बन्द कपाट खोल दें अब तो।

कमलेश भगवती प्रसाद वर्मा said...

kafi rahsay bhari pankitiyan...sunder