Wednesday, April 6, 2016

'औ' एंड 'आ' ...

'औ' एंड 'आ'  ... !
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उमर ढल गई, गाल लटग गए
झुर्रियां भी तमाम चम-चमा रही हैं 'यारा,

बालों को रंगने
और
पॉवडर पोतने से
कोई 'स्वीट सिक्सटीन' हो नहीं जाता ?

ख्यालों को छोडो, उड़ानों को छोडो
ये हाल
सिर्फ ... 'औ' का नहीं, 'आ' का भी है ??

~ श्याम कोरी 'उदय'