Tuesday, April 5, 2016

जिन्दगी ...

जिन्दगी ... !
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धड़कन 
सांसें
आँगन
खुशियाँ 
जितनी तेरीं - उतनी मेरी, 

फिर क्यूँ ...
दुःख के बादल
आधे तेरे - आधे मेरे ?

~ श्याम कोरी 'उदय'

1 comment:

राकेश कौशिक said...

जितनी तेरीं - उतनी मेरी,