Sunday, December 8, 2013

गुनह ...

'खुदा' जाने ये कैसी क़यामत है 
वो सामने होकर भी अजनबी लग रहे हैं आज ? 
… 
मुहब्बत,…… फासले से, चल रही है देख लो यारा 
ऐसी सादगी को, हम … बा-अदब सलाम करते हैं ?
… 
अब तुम ही तय करो मुलाक़ात का वक्त 
तुम समुन्दर हो …… और हमें डूबना है ?
… 
गुनह उनका,……काबिल-ए-माफी नहीं है 'उदय'
पहले मुस्कुराया, फिर पलट के देखा नहीं उन्ने ?
… 

2 comments:

प्रवीण पाण्डेय said...

वाह, बहुत अच्छा।

Rajesh Kumari said...

आपकी इस उत्कृष्ट प्रविष्टि कि चर्चा कल मंगलवार १०/१२/१३ को चर्चा मंच पर राजेश कुमारी द्वारा की जायेगी आपका वहाँ स्वागत है ---यहाँ भी आइये --बेजुबाँ होते अगर तुम बुत बना देते
Rajesh Kumari at HINDI KAVITAYEN ,AAPKE VICHAAR