Monday, October 28, 2013

बददुआ ...

बस तुम एक बार देखकर तो देखो 
गर नजर न ठहर जाए तो कहना !
… 
अब तुम, इस तरह भी न मिला करो 
कि लगे ऐसे दो अजनबी मिल रहे हैं !
… 
गीदड़ भभकियों की तरह मत भभका करो 
कहीं, डरे हुए भी …..…… न डरें तुम से ?
… 
बस एक बार कह के देख लो 
फिर, यकीं हो जाएगा खुद पे ? 
… 
किसी का दिल इतना भी मत दुःख जाए यारो 
कि - उसकी हरेक धड़कन से बददुआ निकले !
… 

4 comments:

अरुण चन्द्र रॉय said...

badhiya rachna

तुषार राज रस्तोगी said...

आपकी यह पोस्ट आज के (२८ अक्टूबर , २०१३) ब्लॉग बुलेटिन - कौन निभाता किसका साथ - पर प्रस्तुत की जा रही है | बधाई

Rajesh Kumari said...

आपकी इस उत्कृष्ट प्रविष्टि की चर्चा कल मंगलवार २९ /१० /१३ को राजेश कुमारी द्वारा चर्चा मंच पर की जायेगी आपका वहाँ हार्दिक स्वागत है ।

Neelima sharma said...

उम्दा रचना