Monday, September 23, 2013

जालिम ज़माना ...

बड़े जालिम हुए हैं लोग 
जो  
फुटपाथ पे भी  
हमें 
चैन से सोने नहीं देते … 
करें तो क्या करें 
अब 
हम 
इस जालिम जमाने का ?

2 comments:

सरिता भाटिया said...

नमस्कार!
आपकी यह रचना कल बुधवार (25-09-2013) को ब्लॉग प्रसारण : 127 पर लिंक की गई है कृपया पधारें.
सादर
सरिता भाटिया
बस इक नजर चाहिए :
''गुज़ारिश''

मदन मोहन सक्सेना said...

सुन्दर अभिव्यक्ति .खुबसूरत रचना
कभी यहाँ भी पधारें।
सादर मदन
http://saxenamadanmohan1969.blogspot.in/
http://saxenamadanmohan.blogspot.in/