Friday, August 30, 2013

आदत ...

कोई माने या न माने वे आज के दौर के जादूगर हैं
दुम हिला-हिला के भी, .…. सरकार चला लेते हैं ?

हम जानते हैं 'उदय', उन्हें,...फाँसी चढ़ाने की जल्दी है
पर डर इस बात का है कोई निर्दोष न चढ़ जाए यारो ?

लो, अब तो वो ............................. गुर्रा भी रहा है
भ्रम न हो जाए हमें, इसलिए दुम भी हिला रहा है ?

अब 'खुदा' ही जाने 'उदय', ये कैसे मंजर हैं
बलात्कारी डरा है, या सरकार डरी हुई है ?

तुम मेरी बातों पे न जाना, बहुत झूठा हूँ मैं
रोतों को हँसाना, …… मेरी आदत है यारो !

3 comments:

Lalit Chahar said...

बहुत सुन्दर प्रस्तुति..
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हिंदी ब्लॉगर्स चौपाल {चर्चामंच} के शुभारंभ पर आपको सूचित करते हुए हर्ष हो रहा है कि आपकी पोस्ट को हिंदी ब्लॉगर्स चौपाल में शामिल किया गया है और आप की इस प्रविष्टि की चर्चा {रविवार} (01-09-2013) को हम-भी-जिद-के-पक्के-है -- हिंदी ब्लॉगर्स चौपाल चर्चा : अंक-002 पर की जाएगी, ताकि अधिक से अधिक लोग आपकी रचना पढ़ सकें। कृपया पधारें, आपके विचार मेरे लिए "अमोल" होंगें | आपके नकारत्मक व सकारत्मक विचारों का स्वागत किया जायेगा |
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सादर ....ललित चाहार

प्रवीण पाण्डेय said...

सन्नाट

ARUN SATHI said...

bahut khoob