Thursday, May 16, 2013

जलसा ...


चेले-चपाटों की आड़ में गुरु बार बार बच रहे हैं 'उदय' 
वर्ना, कौन नहीं जानता, गुरुमंत्र दिया उन्होंने ही है ? 
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भू-भा, भा-भू, की लड़ाई में ये तो कमाल हो गया 
जो न भू था, और न भा था, वो जीत गया 'उदय' 
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उनकी फनकारी के, हम कायल हैं 'उदय', गर शोर थमा नहीं तो 
वे उसे, रेल से उतार कर,............हवाई जहाज में चढ़ा देंगे ??
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रंगों में रंगने की बात होती, तो हम रंग जाते  
उनकी शर्त थी, कि - हमसे हो जाओ तुम ??
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जिसकी अंतिम साँसें भी आजाद नहीं थीं 'उदय' 
उसकी लाश पे, सजा है गजब का जलसा यारो ? 
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3 comments:

प्रवीण पाण्डेय said...

बहुत खूब..

Devdutta Prasoon said...

ठीक है प्रयास !

Rahul said...

very nice...