Saturday, March 9, 2013

हाय-तौबा ...


लो, मुहब्बत हुई भी तो उनसे हुई 
जिन्ने, पहले से ही अपनी सुपाड़ी ले रखी थी ? 
... 
जो बेसहारों के सहारे होने का दम भर रहे हैं 'उदय' 
वो तो खुद ही, किसी न किसी के......सहारे पे हैं ? 
... 
आओ, चलें.........कुछ जज्बात बेच दें हम भी 
वैसे भी, हमें कौन-सा मुरब्बा बनाना है उनका 
... 
न्याय की कहाँ दरकार थी उन्हें 
वे तो, मुआवजे के लिए हाय-तौबा मचा रहे थे 'उदय' ? 
... 

4 comments:

दिनेश पारीक said...

बहुत सार्थक प्रस्तुति आपकी अगली पोस्ट का भी हमें इंतजार रहेगा महाशिवरात्रि की हार्दिक शुभकामनाये

आज की मेरी नई रचना आपके विचारो के इंतजार में
अर्ज सुनिये

कृपया आप मेरे ब्लाग कभी अनुसरण करे

दिनेश पारीक said...

बहुत सार्थक प्रस्तुति आपकी अगली पोस्ट का भी हमें इंतजार रहेगा महाशिवरात्रि की हार्दिक शुभकामनाये

आज की मेरी नई रचना आपके विचारो के इंतजार में
अर्ज सुनिये

कृपया आप मेरे ब्लाग कभी अनुसरण करे

ARUN SATHI said...

khoob...

MANU PRAKASH TYAGI said...

कोई तो हुआ