Thursday, October 25, 2012

भड़ास ...


आज रावण ने रावण जला के, खूब वाह-वाही लूटी है 
पर, दिल के किसी कोने में, बेचैनी जला रही है उसे ? 
...
उनका अहंकार, किसी रावण से कम नहीं है 'उदय'
बस, फर्क है तो, ................. तनिक लचीला है ?
...
भ्रष्टाचार रूपी अवैध बम फट तो रोज रहे हैं 'उदय'
मगर अफसोस, कोई कार्यवाही को तैयार नहीं है ?
... 
हद है 'उदय', लोगों ने, पुतलों पे भड़ास निकाल ली है 
जबकि, कदम-कदम पे, ज़िंदा रावणों की भरमार है ? 

2 comments:

Manu Tyagi said...

बहुत बढ़िया जनाब

प्रवीण पाण्डेय said...

इसका अन्त हर एक के लिये मन के रावण से ही होना है..