Saturday, September 15, 2012

चोरी और सीनाजोरी ...

फेसबुक पे दुकानें तो सब की सजी-धजी दिख रही हैं 'उदय' 
पर, मंहगाई की मार इत्ती है कि कहीं ग्राहकी नहीं दिखती ? 
... 
अब इस कदर भी न मारो, तुम कुल्हाड़ी पे पांव 
खच्च-खच्च-खच्च ... हमसे देखा नहीं जाता ? 
... 
कहने को, तो वो, उन्हें अपना बाप कह रहे हैं 
पर, हकीकत से, वे खुद रु-ब-रु हैं ???????
... 
हमारी खामोशियों की सजा कुछ इस तरह मिली है हमको 
कि - खता किसी और की है, इल्जाम हम पे लगा है यारो ? 
... 
ये उनपे नस्ल का असर है, या है हालात का 
चोरी भी, और सीनाजोरी भी ??? 

3 comments:

प्रवीण पाण्डेय said...

नस्ली टिप्पणी का बुरा मान गये तो..

Upasna Siag said...

bahut badhiya

सु-मन (Suman Kapoor) said...

बढ़िया