Tuesday, August 7, 2012

छट-पटाहट ...


उम्मीदों के जो च़राग, तुमने जलाए हैं 'उदय' 
अब हमें भी उनमें रौशनी नजर आने लगी है !
... 
लो, कल फिर उन्ने झूठ का झंडा फहराया है 
और वहीं-कहीं पे, सच को उन्ने दफनाया है ? 
... 
देखने को तो हमने मुर्दों में भी छट-पटाहट देखी है 'उदय' 
फिर ये तो, .............. देश की भोली-भाली जनता है ?? 
... 
गर तुम्हें टूटने से बचना है तो अकड़ना छोड़ दो यारो 
इस बार हमने, वतन पे मर-मिटने की सौगंध ली है ? 
... 
बड़े अजीबो-गरीब मंजर हैं मुल्क में 'उदय' 
देशभक्तों को, देशद्रोही कह रहे हैं लोग ?? 

2 comments:

प्रवीण पाण्डेय said...

अजब कहानी है ये दुनिया..

संजय भास्कर said...

बहुत बढिया...बधाई स्वीकारें।