Saturday, July 28, 2012

बूढ़े पे हंस रहे हैं ?


कुछ लोग खुश हैं, नाच-गा रहे हैं 
जीत के भ्रम में हैं ... जश्न मना रहे है !
'उदय' ये कैंसे लोग हैं, जो - 
बूढ़े पे हंस रहे हैं ?

यह कहकर, यह सोचकर 
कि - 
मर गया ... आंदोलन !

नहीं ... मरा नहीं है ... 
आंदोलन ... 
कभी ... मर भी नहीं सकता ... 
जब तक भृष्टाचार है, भ्रष्टाचारी हैं ?? 

2 comments:

प्रवीण पाण्डेय said...

लोगों में भविष्य के प्रति आश्वस्ता देख आश्चर्य है..

उपासना सियाग said...

bahut sahi kaha aapne ....bhrshatachai ke hote bhrshtachar kaise mar sakta hai