Tuesday, May 22, 2012

परहेज ...


इरादे क्या हैं उनके, हमें आगरा बुलाने के 
उफ़ ! किस्से तो, दो ही मशहूर हैं वहां के !
... 
काश ! हम भी पत्थर होते 'उदय' 
तो शायद, किसी के सजदे से 'खुदा' हो गए होते !!
... 
न जाने किस चाह में, उन्ने दरवाजा खटखटाया है 
उफ़ ! कल तक तो, उन्हें परहेज था हमसे !!