Monday, May 21, 2012

तन्हाई ...


अब ये तो 'खुदा' ही जानता है, क्या कमी थी हममें 'उदय' 
क्योंकि, सजदे तो हमने भी किये थे ... किसी की चाह के ! 
... 
अब क्या कहें, हम तेरी तन्हाई पे 
कौन है, जो भीड़ में तन्हा नहीं ? 
...  
अब क्या कहें, 'रब' ही जानता है वक्त हमारा 
कि - हम चाहकर भी, क्यूँ दूर हैं तुमसे ? 

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