Saturday, March 10, 2012

आगोश ...

आज की सब, हम तुम्हारी यादों संग ही जागे हैं
अब सोचते हैं, रात भर, हम सोये कैसे बिन तेरे !
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जेहन में जिंदगी की दास्ताँ, खामोश बैठी है
गर ! कुछ नहीं है तो, आओ बातें करें उससे !
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नींद कब आती मुझे है, बिन तेरे आगोश के
कब सोये, कब जगे, अब ये किसे मालुम है !