Sunday, March 11, 2012

खेल ...

हर खेल निराला है, यहाँ वक्त के मसीहा का
कोई हार के जीता है, कोई जीत के हारा है !
...
तेरी आँखें हैं या कोई क़त्ल का औजार है
उफ़ ! जिसे देखे, उसे घायल किये है !!

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