Saturday, March 10, 2012

क्या लिखूँ ?

क्या लिखूँ ?... मैं सोच रहा हूँ
जो तुमको भा जाऊं !
अ ब स द ... क ख ग घ
ए बी सी डी ... एक्स वाय जेड
९ २ ११ ... ५ ३ १८
कुछ न कुछ लिख जाऊं
जग को छोडो ...
तुमको मैं ... थोड़ा तो भा जाऊं
गीत लिखूं
संगीत लिखूं
या फिर मौन मैं लिख जाऊं
क्या लिखूँ ?... मैं सोच रहा हूँ
जो तुमको भा जाऊं !!

3 comments:

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) said...

बहुत अच्छी प्रस्तुति!
इस प्रविष्टी की चर्चा कल रविवार के चर्चा मंच पर भी होगी!
सूचनार्थ!

भारतीय नागरिक - Indian Citizen said...

आपकी सभी कवितायें बड़ी अच्छी होती हैं. इन्हें संग्रह का रूप कब दे रहे हैं.

Dr.NISHA MAHARANA said...

very nice.