Sunday, February 12, 2012

... दूर रहो मुझसे !

बड़ा सुकूं मिला है, क़त्ल कर खुद का
अब, न चाह है, न उम्मीदें हैं !!
...
न चाहकर भी तुम मेरे हुए हो
कहा था मैंने, दूर रहो मुझसे !

2 comments:

सदा said...

बहुत बढि़या।

प्रवीण पाण्डेय said...

सीधा और गहरा..