Friday, January 20, 2012

... सदियों सा लगता है !

वक्त से कौन जीता है ? फिर भी हम लड़ रहे हैं
लड़ते-लड़ते, सुलह का कोई रास्ता ढूंढ रहे हैं !
...
जी तो चाहता है कि जी की सुन लें
पर, उनकी जी से डरते हैं !!
...
ये लड़ाई अभी थमने वाली कहाँ है 'उदय'
सुलह तो कोई चाहता ही नहीं है !!
...
दिलों के टूटने का हश्र, तुम क्या जानो 'उदय'
कुछ घड़ी का जलजला, सदियों सा लगता है !
...
गुजरते वक्त के सांथ, हम कहाँ से कहाँ आ गए हैं
अब क्या कहें, कहाँ तक और जाना है !!

3 comments:

प्रवीण पाण्डेय said...

सदियों तक असर करता है

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) said...

बहुत सुन्दर प्रस्तुति!
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आपकी इस प्रविष्टी की चर्चा कल रविवार के चर्चा मंच पर भी लगाई है!
सूचनार्थ!

sangita said...

सुन्दर अभिव्यक्ति|