Sunday, January 8, 2012

गुनाह ...

हे ईश्वर
मेरा क्या गुनाह है, जो आज -
मैं भूखा हूँ !
हूँ तो हूँ, पर क्यूँ हूँ ?
मजदूर हूँ
रोज कमाता हूँ, रोज खाता हूँ !
कल सुबह से
सारा शहर बंद है -
दंगाइयों की वजह से !
कर्फ्यू की वजह से !!
सच ! इस जनम में, मैंने तो -
कोई गुनाह नहीं किये हैं
फिर मैं क्यों भूखा हूँ -
कल रात से ?
कहीं तेरी नजर में भी -
गरीब होना तो गुनाह नहीं है ?

5 comments:

परमजीत सिँह बाली said...

bahut baDhiyaa!!

shama said...

कहीं तेरी नजर में भी -
गरीब होना तो गुनाह नहीं है ?
Shayad hamara 'hona'hee gunah hai!

प्रवीण पाण्डेय said...

सच में कोई गुनाह नहीं है..

S.M.HABIB (Sanjay Mishra 'Habib') said...

गंभीर सार्थक चिंतन...

सागर said...

behtreen aur gahan abhivaykti.........