Monday, January 23, 2012

स्त्री होकर सवाल करती है ...



"बोधि प्रकाशन" से प्रकाशित स्त्री विषयक काव्य संग्रह - "स्त्री होकर सवाल करती हो ...!" आज प्राप्त हुई, बेहद खुशी हुई ... सर्वप्रथम इस पुस्तक से प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रूप से जुड़े सभी हमकदम मित्रों को बधाई व शुभकामनाएं ...
सांथ-ही-सांथ इस ऐतिहासिक "काव्य संग्रह - स्त्री होकर सवाल करती हो ...!" की सफलता के लिए अमिट, असीमित, अनंत शुभकामनाएं ...

मित्रों, इस संग्रह में देश के जाने-मानें १२७ रचनाकारों के सांथ मेरी भी रचनाएँ हैं ... आप निसंकोच इस ऐतिहासिक काव्य संग्रह को अवश्य पढ़ें ...

इसी संग्रह से कुछ पंक्तियाँ -
०१ -
" ...
स्त्री बोली - ना
( वह बोला - नखरे दिखाती है साली ... )
स्त्री बोली - हाँ
( वह बोला - चालू है यार ... )
... "
०२ -
" ...
कभी तू डूब जाता है मुझमें
कभी कहता है मुझे
डूब जाने को
फर्क क्या है, तेरे, या मेरे
डूब जाने में
... "
०३ -
" ...
एक देह है जो बिछी है
घर के दरवाजे से लेकर
रसोई, बैठक और बिस्तर तक
न घिसती है
न चढ़ता है मैल इस पर
... "

ब्रेक के बाद ... फिर कभी, कुछ नई पंक्तियों के सांथ ... !!
...
"स्‍त्री होकर सवाल करती है....!"/फेसबुक पर मौजूद 127 रचनाकारों की स्‍त्री विषयक कविताओं का संग्रह/संपादक डॉ लक्ष्‍मी शर्मा/पेपरबैक/संस्‍करण जनवरी 2012/पृष्‍ठ 384/मूल्‍य 100 रुपये मात्र (डाक से मंगाने पर पैकेजिंग एवं रजिस्‍टर्ड बुकपोस्‍ट के 50 रुपये अतिरिक्‍त)/बोधि प्रकाशन, एफ 77, करतारपुरा इंडस्ट्रियल एरिया, बाईस गोदाम, जयपुर 302006 राजस्‍थान।
संपर्क दूरभाष : 099503 30101, 08290034632 (अशोक)

2 comments:

प्रवीण पाण्डेय said...

रोचक..

सुमन'मीत' said...

सच कहा आपने ..ये संग्रह सच मेलाज्वाब है ...मुझे बहुत खुशी है कि मैं भी इसका हिस्सा बनी