Thursday, January 12, 2012

... खेल-तमाशा चलने दो !

नेता बजाने आ गए हैं, मतदाता बजने को खड़े हैं
डम-डम डम-डम होने दो, खेल-तमाशा चलने दो !
...
नेता नेता कहे पुकार, खरबूजा हो कटने तैयार
पांच साल में आए हैं, तुझको खा कर जाएंगे !
...
ख्वाहिशें सिमट जाएं तो मुटठी हैं
बिखर जाएं तो दुनिया है !
...
नीयत का खोट, उसके शब्दों में छलक रहा था
फिर भी कहता है, वो मेरी तारीफ़ कर रहा था !
...
जब दुआएं भी बेअसर सी लगने लगें
क्यूँ न, बेहिचक, यादें सहेज ली जाएं ?