Wednesday, December 14, 2011

... किसी दिन काम आएंगे !

सच ! दौलत सहेजने के लिए, न सही
पर जीने के लिए, बेहद जरुरी है !!
...
गुरुर का टूटना जरुरी था
वर्ना जिंदगी का सफ़र, आसां नहीं होता !
...
झूठी शान की छतें, न सही
बादलों की आड़ में भी सो लेते हैं !
...
कब्र में भी चैन नहीं है
'खुदा' जाने, लोग शहर में कैसे जीते हैं ?
...
पड़े रहने दो आँगन में, किसी का क्या बिगाड़ेंगे
पत्थर हैं सही, लेकिन किसी दिन काम आएंगे !

4 comments:

रश्मि प्रभा... said...

गुरुर का टूटना जरुरी था
वर्ना जिंदगी का सफ़र, आसां नहीं होता !... न ज़िन्दगी की सही पहचान होती .

प्रवीण पाण्डेय said...

हर किसी का काम आना, हर किसी को भूल जाना,
प्रश्न के उत्तर मिले तो जिन्दगी हमको बताना।

भारतीय नागरिक - Indian Citizen said...

bahut hi baddhiya....

VINOD GUPTA said...

you have rightly pointed out and one should know that he/she can't survive in this world. Please avoid copying. Have a great creativity ahead for all.