Sunday, June 19, 2011

यादों के साये में ... बाबू जी !!

बाबू जी ...
क्या थे, क्या नहीं थे
आज भी, समझना बांकी है
आज "फादर्स डे" पर
वे, यादों में, कुछ इस तरह
उमड़ आये
आँखें, चाह कर भी
खुद--खुद नम हो गईं
वैसे तो अक्सर
हो ही जाती हैं, नम
आँखें, उनकी याद में
पर, आज, कुछ ज्यादा ही
लबालब हो चलीं
खैर ...
कोई चाहे, या भी चाहे
फिर भी होते हैं सांथ
हर घड़ी, हर पल, हर क्षण
जिन्दगी के सफ़र में
बन ... हमसफ़र
संग संग ...
यादों के साये में ... बाबू जी !!

10 comments:

भारतीय नागरिक - Indian Citizen said...

पिता,बस नाम ही काफी है.

अमित श्रीवास्तव said...

क्या कहूँ..

बस नमन उन्हें ।

वन्दना said...

पिता नाम ही काफ़ी होता है।

kshama said...

Mujhe aise me apne Dada ji yaad aate hain...aur aankhen nam hotee hain.

प्रवीण पाण्डेय said...

मेरा भी प्रणाम, बधाई इस दिन की।

संजय भास्कर said...

पितृ दिवस पर खूबसूरत रचना बहुत सुंदर अभिव्यक्ति....

गिरीश"मुकुल" said...

बहुत उम्दा

गिरीश"मुकुल" said...

मेरा भी नमन

संगीता पुरी said...

पितृ दिवस पर आपके द्वारा की गयी इस सुंदर प्रस्‍तुति की चर्चा ब्‍लॉग4वार्ता में की गयी है !!

Surendra shukla" Bhramar"5 said...

श्याम कोरी उदय जी -मार्मिक लेख -निम्न पंक्तियाँ बहुत ही सटीक पिता पर -शुभ कामनाएं

कोई चाहे, या न भी चाहे
फिर भी होते हैं सांथ
हर घड़ी, हर पल, हर क्षण
जिन्दगी के सफ़र में
बन ... हमसफ़र
संग संग ...
यादों के साये में ... बाबू जी !!
शुक्ल भ्रमर ५