Monday, June 27, 2011

... तेरा होता मगर, सिर्फ तेरा नहीं होता !!

होने को तो जिन्दगी खुद ही पाठशाला है
गर नहीं है तो, खुद कोई शिक्षक नहीं है !
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काश ! हमारा भी कोई तो पता होता, भले छोटा-बड़ा होता
कोई एकाद तो होता, जो हम तक पहुँच गया होता !
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शराब के प्यालों में डुबकियां लगा रहे हैं, नेता और अफसर
उफ़ ! यही मक्का, यही काबा, यही अब कुम्भ हुआ है !
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हंसी वादियों में, हंसी चेहरे, और हंसी जज्बात हैं
मोहब्बत है, दो दिलों में, और झूमते ख्यालात हैं !
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क्या हुआ जो योजनाएं कागजों पे हैं
सच ! हैं तो सही, क्या यही कम है !!
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रंगों की दुनिया, क्या खूब सझाते हो तुम 'उदय'
कमी होती है तो, खुले जज्बात नहीं होते !!
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अगर हम चाह लें तो, क्या कुछ कर नहीं सकते
नहीं चाहें, तो फिर कुछ कर भी नहीं सकते !
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कोई छोटा, तो कोई बड़ा, खुद को मान बैठे
फलसफे हैं भावों के, छोटे-बड़े उभर आते हैं !
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बा-अदब बैठे रहे, तेरे आगोश में हम
सांसें तपते रहीं, तुम समझे हम !
...
अगर होता 'खुदा' तो, फिर मैं क्या नहीं होता
तेरा होता मगर, सिर्फ तेरा नहीं होता !!

2 comments:

anu said...

काश ! हमारा भी कोई तो पता होता, भले छोटा-बड़ा होता
कोई एकाद तो होता, जो हम तक पहुँच गया होता !

सार्थक रचना

परमजीत सिँह बाली said...

बहुत सुन्दर रचना।बधाई स्वीकारें।