Sunday, June 26, 2011

... इंग्लिश भी मैं पढ़ लेता, हिन्दी भी मैं पढ़ लेता !

कभी मिट्टी, कभी सोना, कभी कुछ और होता है
अगर होता भी है पत्थर, तब तू 'रब' होता है !
...
उफ़ ! तो बेचे गए, और ही खरीदे गए
मोल जिस्म का लगा, जज्बात अनमोल रह गए !
...
सच ! तुम्हारा रंग, कहां मिलता है, रंग से मेरे
तुम आसमानी हो, और मैं ठहरा, रंग काला !
...
उठा नजर, मत देख मेरे हांथों को
देख सकती है तो देख, दिल ही 'गुलाब' है मेरा !
...
किसी ने छिपा ली है नजर, देख कर मुझको
बा-अदब देखती है, छिप-छिप कर मुझको !
...
जन्म, कर्म, फल, लकीरें, और रंग दुनिया के
कहीं बेरंग दिखती है, कहीं सतरंगी है दुनिया !
...
गर होतीं जेब कफनों में, फिर मुर्दे दफ़्न होते
पड़े होते, सड़े होते, दर और दीवार में सब !
...
जिन्दगी के सफ़र में, हर घड़ी, रुतें बदलती हैं
कभी देखो तो उलझन है, कभी आशाएं ढेरों हैं !
...
सच ! गोली है, बम है, और ही है तोप का गोला
अगर कुछ है, लेखन में, तो कविता, है आग का शोला !
...
काश ! मैं इतना पढ़ा होता, तेरे शब्दों को समझ लेता
फिर इंग्लिश भी मैं पढ़ लेता, हिन्दी भी मैं पढ़ लेता !

4 comments:

प्रवीण पाण्डेय said...

भाषाओं से बड़े कठिन हैं भावों के शब्द।

Dr.J.P.Tiwari said...

उफ़ ! न तो बेचे गए, और न ही खरीदे गए
मोल जिस्म का लगा, जज्बात अनमोल रह गए !
...

Anmol kathy. Thanks brother.

मनोज कुमार said...

भावों की उत्तम अभिव्यक्ति।

anu said...

उतम प्रस्तुति के साथ ...हर शेर बहुत उम्दा ...बहुत खूब