Sunday, February 27, 2011

उफ़ ! किसी मासूम की, कहीं जान न निकल जाए !!

हम तो दफ्न कर के गए थे, कल विवादों को
जाने किसने उन्हें कुरेद के, ज़िंदा फिर कर दिया !
...
सरकार चिंतित नहीं, हम विदेश में हैं, जान आफत में है
उफ़ ! सरकार की तो छोडो, तुम्हें कब देश की चिंता रही !
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सरकार और जनता का, रोना-धोना बंद कराया जाए
दोनों फिकरमंद हैं, दोनों को पर्याप्त मौक़ा दिया जाए !
...
लो अभी तक तो हमने कुछ किया नहीं, फरेबी बना दिया
जो वादे, दिल तोड़ के बैठे हैं, उन्हें कोई कुछ नहीं कहता !
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चलो अच्छा हुआ, तस्वीर की चाह में, आज बन गए बुत तुम
कल जब हम कहें, लिखना है गजल, तब तुम्हें आना पडेगा !
...
इंतज़ार पे इंतज़ार हम करते रहे, आज अफसोस हुआ
जब किसी ने कहा, ये तो तुम्हारी हमेशा की आदत है !
...
कोई कद, ही कोई काठी है मेरी
जाने क्यों, लोग मुझसे डरते हैं !
...
छलकने दो, छलकाने दो, क्या फर्क पड़ता है
जिस्म ही तो है, कौन-सा ख़त्म हो जाएगा !
...
कैटरीना अब तुम इतनी भी मत मटकाओ कमरिया
उफ़ ! किसी मासूम की, कहीं जान निकल जाए !!

8 comments:

Rahul Singh said...

अंतिम पंक्ति पर तो आइटम सांग बन सकता है.

madhuri said...

Wonderful....Bahut achha likha hai aapne...:))

राज भाटिय़ा said...

कैटरीना अब तुम इतनी भी मत मटकाओ कमरिया
उफ़ ! किसी मासूम की, कहीं जान न निकल जाए !!
यह धंधा भी गंदा हे

प्रवीण पाण्डेय said...

वाह।

yami :-) said...

bohut khub :-)

S.M.HABIB said...

waah... rahul ji sahi kahte hain... antim pankti par ek jordaar item song ban saktaa hai...

amit-nivedita said...

excellent....

भारतीय नागरिक - Indian Citizen said...

कमाल की कट-री-ना..