Saturday, August 14, 2010

स्वतंत्रता से अभिप्राय ........... एक कडुवा सच !!!

स्वतंत्रता, आजादी, स्वछंदता, मनमौजीपन किसे पसंद नहीं है इस धरा पर जीवन-यापन करने वाला प्रत्येक इंसान स्वतंत्रता पूर्वक जीवन जीना चाहता है पर उसकी स्वतंत्रता के मायने क्या हैं और क्या होना चाहिए !

... स्वतंत्रता का सीधा-सीधा तात्पर्य एक अनुशासित मर्यादित जीवन को जीने से है क्या हम अनुशासित मर्यादित जीवन जी रहे हैं ?

... शायद इस प्रश्न के उत्तर में ढेरों लोग यह चिल्लाने लगें कि हाँ हम अनुशासित मर्यादित जीवन जी रहे हैं, बहुत से लोग आपस में घुसुर-पुसुर करने लगें तथा बहुत से लोग बिलकुल मौन हो जाएँ ... कुछ भी संभव है !

... हम क्या सोच रहे हैं, हम क्या कर रहे हैं, और क्या हमारे अन्दर है ... संभवत: तीनों में विरोधाभाष हम स्वयं महसूस करें, यह विरोधाभाष क्यों - किसलिए !

... इसमे आश्चर्यजनक ज्यादा कुछ नहीं है हम मानव हैं और मानव जीवन जी रहे हैं इसलिए यह विरोधाभाष हो सकता है सांसारिक जीवन स्वमेव आश्चर्यो का एक पुलिंदा है जहां हर क्षण उथल-पुथल होते रहते हैं किन्तु हमें इस उथल-पुथल को संयमित करते हुए अनुशासन बनाकर मर्यादित स्वतन्त्र जीवन जीना चाहिए !

6 comments:

कविता रावत said...

aapne bahut hi achhi tarah es swadhinta diwas ko aaj ke sandarbh mein paribhashit kiya hai.. sach mein aaj yah haal dekh bahut dukh hota hai...
स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक बधाई व शुभकामनाएं

देवेश प्रताप said...

बहुत सुन्दर रचना ........स्वतंत्रता दिवस कि ढेर सारी शुभकामनाएं .

गब्बर सिंग said...

haa haa haa haa ..........

गब्बर सिंग said...

.......... jay hind.

डॉ टी एस दराल said...

अच्छा लिखा है । मजेदार कविता ।

स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक बधाई व शुभकामनाएं

ताऊ रामपुरिया said...

स्वतंत्रता दिवस के शुभ अवसर पर हार्दिक अभिनन्दन एवं शुभकामनाएँ.

रामराम.