Saturday, August 14, 2010

गुरु - चेला !

हास्य-व्यंग्य - " गुरु - चेला "


( जिला मुख्यालय का पुलिस ग्राउंड - १५ अगस्त आजादी का पर्व )

चेला - भईय्या मेरी इच्छा हो रही है कि आप भी किसी दिन ... अपने शहर के इस पुलिस ग्राऊंड पर आजादी का झंडा फहराओ ... देखा आपने कैसे कलेक्टर, एस.पी. मिलकर मंत्री को सैल्यूट मार रहे थे
गुरु - हां देख रहा हूं पर अपुन लोग चोर-उचक्के हैं ... कैसे झंडा फहरा सकते हैं !... शहर के सभी पुलिस थाणे में अपुन लोग का क्रिमनल रिकार्ड है

चेला - तो क्या हुआ भईय्या ... क्या फर्क पड़ता है ... आजकल क्रिमनल रिकार्ड वाले भी झंडा फहरा रहे हैं ... आप भी फहरा सकते हो ... आप को तो मालुमिच्च है कि सीबू सोरेन को ह्त्या के मामले में सजा हो गयेला था कोर्ट से, फिर भी वह मुख्यमंत्री बन गयेला था और झंडे-पे-झंडा फहरा रहा था ... और देखो कितने सांसद विधायक हैं जिनके ऊपर क्रिमनल-ही-क्रिमनल रिकार्ड हैं फिर भी डंके की चोट पर नेतागिरी कर रहेले हैं ... ये तो दूर की बात हो गई, अपुन के पास में ही देख लो वो "फिरकी पठान" ... साला कबाड़ी कितने बार अन्दर हुयेला है जब से मंत्री ने उसकी पीठ पर हाथ क्या रख दिया है तब से उसके तेवर ही बदल गए हैं आखिर गृहमंत्री का चेला जो बन गया है ... उसने ही छब्बीस जनवरी को अपने थाणे में झंडा फहराया था ...
गुरु - तू ठीक कह रहा है ... (सीना तानते हुए) हाँ अपुन भी झंडा फहरा सकता है ... पर तू कुछ उपाय बता ... तू तो जानता है अपुन जो भी करता है तेरेच्च से पूंछ के करता है

चेला - एक काम करने का ... आज से चोरी, लूट, छिन्टाई, उठाईगिरी, मारपीट, ... टोटली बंद ... आज से फुल्ली नेतागिरी करने को मांगता ... देखते हैं कौन रोकता है अब अपुन को झंडा फहराने से ... आखिर अपुन के देश में लोकतंत्र है, प्रजातंत्र है, मानव अधिकार आयोग है, हाईकोर्ट है, सुप्रीमकोर्ट है ... ये सब अपुन का मदद करेगा, कोई टांग अडायेगा तो अपुन इन्हीच्च का दरवाजा खटखटाएगा ... अब झंडा फहराने से कोई नहीच्च रोक सकता ... अपुन है भईय्या
गुरु - ठीक है तू बोलता है तो मान लेता हूँ ... हाँ अब अपुन ही झंडा फहराएगा ... बस तू बताते चल आगे आगे क्या करना है ...

( तालियों की गडगडाहट ने गुरु-चेले को दो साल पुरानी यादों से बाहर निकाला )

चेला - देखा भईय्या ... दो साल पहले अपुन ने इसीच्च पुलिस ग्राउंड पर ... दूर वहां बैठकर सपना देखा था ... जो आज जब आपने झंडा अपने हांथों से फहराया तो पूरा हुआ ... याद है आपको अपुन क्या बोला था ...
गुरु - हाँ ... सब कुछ याद है ... वो सब तेरी बदौलत पूरा होएला है ... सचमुच ये अपना देश है ... भारत महान है ... आज अपुन सच्चे दिल से सैल्यूट मारा है ...

चेला - ... भईय्या अपुन ये सोच रहेला है कि जब अपने टाईप के चिरकुट लोग यहाँ तक पहुँच गए हैं तो पूरे देश ...
गुरु - ... अरे चुप ... आगे कुछ मत बोल ... अभी तक अपुन तेरी सुन सुन कर यहाँ तक पंहुच गयेला है आगे भी सुनते रहेगा ... पर मेरी एक बात तू सुन ले ... ये अपुन का देश है ... अपुन दोनों का एकिच्च नारा होना चाहिए ... जय हिंद ... जय हिंद ... जय हिंद ... जय हिंद ... !

16 comments:

ज़ाकिर अली ‘रजनीश’ said...

गहरा व्यंग्य।

………….
सपनों का भी मतलब होता है?
साहित्यिक चोरी का निर्लज्ज कारनामा.....

kshama said...

Watan ke jo bhi halaat hain,ham sabhi uske liye zimmedaar hain...is baat se ham mukar nahi sakte!

राज भाटिय़ा said...

आप से सहमत जी

AMIT said...

nice post

गब्बर सिंग said...

व्यंग्य या सच्चाई ..........

गब्बर सिंग said...

हाहाहाहा ..... हाहाहाहा...... आक-थू

उठा पटक said...

बहुत बढिया!

bilaspur samaachaar said...

स्वतंत्रता दिवस की बधाई .

Sonal said...

aapse sahmat hu..
badiya..

Meri Nayi Kavita aapke Comments ka intzar Kar Rahi hai.....

A Silent Silence : Ye Kya Takdir Hai...

Banned Area News : My morning drive is great independence for me: Big B

VICHAAR SHOONYA said...

उदय जी बढ़िया व्यंग. अच्छा लगा.

वन्दना said...

behatareen vyangya.

सुज्ञ said...

अच्छा कटाक्ष !!
भाव पूर्ण अभिव्यक्त हुआ।

ललित शर्मा-للت شرما said...

बाजा फ़ाड़ दिए श्याम भाई

ललित शर्मा-للت شرما said...

मारा पापड़ वाले को,
स्वतंत्रता दिवस की शुभकामनाएं।

अनामिका की सदायें ...... said...

अच्छा लगा नाटय व्यंग और कविता भी.

जय हिंद.

संगीता स्वरुप ( गीत ) said...

बहुत बढ़िया प्रस्तुति ....गहरा व्यंग ..