Thursday, August 12, 2010

इंसान कम ..... शैतान ज्यादा हो गया है !

इंसान अब, इंसान कम,
हैवान ज्यादा हो गया है
हर गली - हर मोड पर,
शैतान बन कर घूमता है

क्या मिला उसको
वो जब तक इंसा था
हैवान जब से बना
तो सरेआम हो गया है

भीख में मिलती नहीं
थीं रोटियां
लूटने निकला तो खूब
मिल रहीं हैं बोटियां

बद हुआ, बदनाम हुआ
और ज्यादा क्या हुआ
था निकम्मा वो बहुत
पर आज तो काम गया है

देखता है जब खुदी को
आँख के आईने में वो
शर्म क्या, शर्मसार वो
खुद के जहन में हो गया है

क्या हुआ इंसान को
जो हैवान ज्यादा हो गया है
इंसान अब, इंसान कम
शैतान ज्यादा हो गया है !

17 comments:

Sunil Kumar said...

आम आदमी की सच्चाई को दर्शाती एक सुंदर रचना , बधाई

संगीता पुरी said...

बढिया रचना !!

राजभाषा हिंदी said...

बहुत अच्छी प्रस्तुति।
राजभाषा हिन्दी के प्रचार-प्रसार में आपका योगदान सराहनीय है।

kshama said...

Insaani fitrathi kuchh aisi hai,ki,mauqa miltehi wo shaitan ban baithta hai...yah aaj kalka sach nahi,sadiyon se chala aa raha silsila hai!

Udan Tashtari said...

बेहतरीन!

गब्बर सिंग said...

शैतान .... हा हा हा हा .... हा हा हा हा ....

निर्मला कपिला said...

बिलकुल सही बात है अच्छी लगएए रचना। जय हिन्द।

संगीता स्वरुप ( गीत ) said...

आज के सत्य को बताती सटीक रचना

उठा पटक said...

बहुत बढिया!

वाणी गीत said...

सही कहा ...!

Coral said...

सत्यवचन!

CS Devendra K Sharma said...

sach ka samna mat karwaiye sir.....dar lagta hai hahaha

अशोक बजाज said...

क्या हुआ इंसान को
जो हैवान ज्यादा हो गया है
इंसान अब, इंसान कम
शैतान ज्यादा हो गया है !


बहुत अच्छी रचना , बधाई !!

संगीता स्वरुप ( गीत ) said...

मंगलवार 17 अगस्त को आपकी रचना ... चर्चा मंच के साप्ताहिक काव्य मंच पर ली गयी है .कृपया वहाँ आ कर अपने सुझावों से अवगत कराएँ ....आपका इंतज़ार रहेगा ..आपकी अभिव्यक्ति ही हमारी प्रेरणा है ... आभार

http://charchamanch.blogspot.com/

M VERMA said...

सुन्दर रचना

अनामिका की सदायें ...... said...

आप बहुत अच्छा लिखते हैं.
प्रभावशाली अभिव्यक्ति.

दिगम्बर नासवा said...

क्या हुआ इंसान को
जो हैवान ज्यादा हो गया है
इंसान अब, इंसान कम
शैतान ज्यादा हो गया है ,..

सच कहा है ... आज का दौर तो ऐसा ही है ... इंसान हैवान बन गया है ...