Tuesday, June 8, 2010

शेर

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तेरी जुबां का ईमान देखकर, तेरी आंखों से यकीं उठ चला है
कभी हां, कभी ना, अब तू ही बता, ये क्या फ़लसफ़ा है ।

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6 comments:

दिलीप said...

waah bahut khoob sir...

राजीव तनेजा said...

बहुत बढ़िया

arvind said...

तेरी जुबां का ईमान देखकर, तेरी आंखों से यकीं उठ चला है
कभी हां, कभी ना, अब तू ही बता, ये क्या फ़लसफ़ा है ।

...bahut khub.

kshama said...

Wah, kya baat kahi hai..!

संजय भास्कर said...

हमेशा की तरह बहुत शानदार। क्या कहने।

डॉ टी एस दराल said...

ना में भी तो हाँ होती है ना।