Tuesday, May 12, 2009

शेर - 37

कभी तुम रोज मिलते हो, कभी मिलते नहीं यारा
तुम्हारी ये अदाएँ भी, क्या कातिल अदाएँ हैं।

6 comments:

"अर्श" said...

WAAH JHOOMAA DIYA IS SHE'R NE WAAKYEE.

AABHAAR


ARSH

रश्मि प्रभा... said...

bahut-bahut hi sundar......

अल्पना वर्मा said...

:) rumaani hawa bah gayi lagta hai kahin?
badhiya sher!

डॉ. मनोज मिश्र said...

bahut khoob.

महावीर said...

'कड़ुवे सच' में तो जगह जगह मिठास ही मिठास है। हर शेर और रचना जैसे बोल रही हो। आनंद आगया आपके ब्लाग पर आकर!
महावीर शर्मा

Babli said...

बहुत बढ़िया!