Saturday, February 1, 2014

अधिकार ...

दुआओं, मन्नतों, प्रार्थनाओं से भी अब कुछ नहीं होगा 
कोई समझाये उन्हें, 
हमसे दोस्ती, … फिर से, … मुमकिन नहीं यारा ???
,,, 
सच ! कुछ कर गुजरने के माद्दे ने 'उदय' 
उन्हें ख़ास से आम बना दिया है आज ? 
… 
उनकी लफ्फाजियों से हम तंग आ गए हैं 'उदय' 
सुबह हो या शाम,… जब देखो तब वही बातें ?? 
… 
ख़्वाब देखने का अधिकार, कोई हमसे न छीने 'उदय' 
आज से, हम भी…………… पीएम-इन-वेटिंग हैं ?
… 

Monday, January 27, 2014

पीएम-इन-वेटिंग ...

भ्रष्टाचार व दाग मुक्त राजनीति की ओर कदम बढ़ाएं  
सभी देशवासियों को गणतंत्र दिवस की शुभकामनाएँ !
… 
किसी और ने, ख़्वाबों में ख़्वाब सजाया है 
वो तो सिर्फ,……… पीएम-इन-वेटिंग हैं ?
… 
शायद ! हमें ही, … … … भ्रम हो गया था 'उदय' 
जबकि पलट के देखने की उनकी आदत पुरानी है ? 
… 
शातिरों की, सत्ता-औ-लूटपाट खूब देख ली हमने 
क्यों न कुछ दिन नौसिखियों को आजमाया जाए ?
… 
सुनते हैं, उन्ने भी, पीएम-इन-वेटिंग का ख़्वाब सजाया है 
पर, लेकिन, किन्तु, कहीं ऐसा न हो, उनकी नींद न टूटे ?
… 

Friday, January 24, 2014

आदत ...

न तो कोई हारा है, और न ही कोई जीता है 
पर, मगर, जिसे देखो, है वही मुगालते में ? 
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गर, हजम न भी हो तो कोई बात नहीं, 
इक बार … 
कड़वी दवा को भी तो आजमा के देखो ? 
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साठ साल… साठ महिने 
चलो … ये भी खूब रही ?
… 
अब हम भी 'उदय', उनके जैसे हो गए हैं 
जुबां पे कुछ, दिल में कुछ और होता है ? 
… 
गर ये तमाशा है, तो तमाशा ही सही 
सड़क पे बैठने की, आदत पुरानी है ? 
… 

Monday, January 20, 2014

बेरहम ...

उन्ने, दुआ तो माँगी थी, मगर खामोशियों में 
उफ़ ! 'खुदा' भी मौन रह कर, हमें देखता रहा ? 
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हम जानते हैं, उन्हें, इतनी बेरहमी रास नहीं आनी है 
मगर ये बात,…………… उन्हें समझाये कौन ???
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बेफिजूल के मुद्दे हैं, बेफिजूल के किस्से हैं 
नाम का लोकतंत्र है, नाम का जनतंत्र है ? 
… 
उफ़ ! बहुत बेरहम है यार मेरा 
मिलकर भी…मिलता नहीं है ?
… 

Thursday, January 16, 2014

शातिर ...

इतने भी नहीं, उतने भी नहीं 
अब … 
तुम ही कहो, तुम कितने हो ? 

शातिर तो हो … 
ये तय है सनम 

पर कितने हो 
ये तय … 
तुम ही करो, तुम ही करो ??